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छात्र-छात्राओं ने सीखा आपात स्थिति में गंभीर मरीज की जान बचाने का गुर

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 28 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
छात्र-छात्राओं ने सीखा आपात स्थिति में गंभीर मरीज की जान बचाने का गुर

भास्कर न्यूज | अंबिकापुर राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर में 2026-27 बैच के नवप्रवेशित एमबीबीएस छात्रों के लिए शनिवार को विशेष बेसिक कार्डियक लाइफ सपोर्ट (बीसीएलएस) प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। एनेस्थीसिया विभाग की ओर से आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य छात्रों को आपातकालीन परिस्थितियों में मरीज की जान बचाने के लिए आवश्यक प्राथमिक चिकित्सा और पुनर्जीवन तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना था।

प्रशिक्षण के दौरान मेडिकल कॉलेज का माहौल पूरी तरह व्यावहारिक नजर आया। वरिष्ठ चिकित्सकों ने छात्रों को बीसीएलएस की बारीकियां समझाईं, वहीं छात्रों ने मानव पुतले पर कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) का अभ्यास किया। छात्रों ने छाती पर सही तरीके से दबाव देने, मरीज की स्थिति का आकलन करने और आपात स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाने की प्रक्रिया सीखी।

विशेषज्ञ चिकित्सकों डॉ.

पार्थ, डॉ. शिवानी, डॉ. मनीष और डॉ.

हर्षा सिंह ने छात्रों को सीपीआर की तकनीक के साथ एयरवे को सुचारू रखने का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। चिकित्सकों ने बताया कि आपातकालीन स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में सही समय पर सीपीआर और एयरवे प्रबंधन की जानकारी मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कार्यक्रम विभागाध्यक्ष डॉ.

आरके निगम के मार्गदर्शन और डीन डॉ.

अविनाश मेश्राम के नेतृत्व में आयोजित किया गया। आयोजन को सफल बनाने में एमईयू समन्वयक डॉ. परमानंद अग्रवाल, फाउंडेशन कोर्स प्रभारी डॉ. नीलिमा कुमारी के साथ सहयोगी संकाय डॉ. आभा, डॉ. मेराज और डॉ.

प्रतिमा का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मेडिकल शिक्षा की शुरुआत में ही मिले इस व्यावहारिक प्रशिक्षण को लेकर नवप्रवेशित छात्र उत्साहित नजर आए। छात्रों ने कहा कि इस तरह के अभ्यास से उन्हें आपात स्थिति में आत्मविश्वास के साथ मरीज की मदद करने की समझ विकसित होगी। बीसीएलएस (बेसिक कार्डियक लाइफ सपोर्ट) एक आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रिया है।

इसका उपयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति की सांस अचानक रुक जाती है या दिल की धड़कन (कार्डिएक अरेस्ट) बंद हो जाती है। इसमें बिना किसी भारी मेडिकल उपकरण के, सिर्फ हाथों के दबाव (सीपीआर) और मुंह से सांस देकर मरीज को तब तक जीवित रखा जाता है जब तक उन्नत इलाज न मिल जाए। कार्डिएक अरेस्ट के शुरुआती 3 से 4 मिनट बेहद नाजुक होते हैं।

यदि इस दौरान सही बीसीएलएस मिल जाए, तो मरीज के बचने की संभावना 50 से 70% तक बढ़ जाती है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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