छात्रा की मौत के बाद टूटी अफसरों की नींद:लक्ष्मीपुरवा में 4 महीने से घरों के बाहर भरा सीवर का पानी,50 बीमार,3 हजार की आबादी बेहाल
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →कानपुर के अफीमकोठी के पास डॉट नाला धंसने के बाद लक्ष्मीपुरवा की गलियों और घरों में चार महीने से सीवर का गंदा पानी भरा रहा। लोग शिकायत करते रहे, बीमारी फैलती रही, लेकिन जिम्मेदारों की नींद तब टूटी जब टाइफाइड की चपेट में आई 11वीं की छात्रा खुशी की मौत हो गई। इसके बाद मंगलवार को नगर निगम, जलकल और स्वास्थ्य विभाग की टीमें इलाके में पहुंचीं।
तीन पंप लगाकर पानी निकाला गया और सफाई के साथ ब्लीचिंग व एंटी लार्वा का छिड़काव शुरू कराया गया। देखिए 5 तस्वीरें… पानी कम हुआ तो सामने आई असली मुसीबत वार्ड-1 लक्ष्मीपुरवा की 85/74, 85/120 और 85/121 की गलियों में करीब 4 महीने से जलभराव की समस्या बनी है। सीवर का गंदा और बदबूदार पानी गलियों से होते हुए कई घरों के अंदर तक पहुंच गया है।
लंबे समय तक पानी जमा रहने के कारण अब पूरे इलाके में कीचड़ और गंदगी फैल गई है। इलाके की शांति देवी ने बताया कि 5 महीने बीतने के बावजूद नाले और जलनिकासी की समस्या खत्म नहीं हुई। घरों के बाहर गंदगी जमा रहने से बदबू इतनी ज्यादा है कि सांस लेना तक मुश्किल हो गया है और पानी में पनपे मच्छरों के कारण संक्रमण का खतरा बना है।
एक मौत के बाद जागा जलकल-नगर निगम लक्ष्मीपुरवा में रहने वाले धीरज की 11वीं में पढ़ने वाली बेटी खुशी की संक्रमण की चपेट में आने से मौत के बाद हड़कंप मच गया। मंगलवार को जलकल, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लक्ष्मीपुरवा पहुंचीं। जलकल ने तीन पंप लगाकर गलियों में भरा पानी निकलवाया, लेकिन अब पानी उतरने के बाद गलियों में कीचड़, सड़ांध और गंदगी का ऐसा अंबार है कि लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है।
जगह-जगह अभी भी पानी जमा है। मच्छरों और कीड़ों का प्रकोप भी बढ़ गया है। करीब तीन हजार की आबादी इस समस्या से प्रभावित है और बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक बीमार पड़ रहे हैं। नगर निगम के अभियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने भी क्षतिग्रस्त डॉट नाले की समस्या को देखते हुए पाइप लाइन डालने के लिए निरीक्षण किया।
50 लोग संक्रमण की चपेट में स्थानीय लोगों ने बताया कि जलभराव और गंदगी के कारण करीब 50 लोग बीमार हैं। लक्ष्मीपुरवा के 85/120 निवासी राजेश ने बताया कि घर के आसपास लंबे समय से गंदगी का अंबार लगा है। पिछले दो महीने से उनकी तबीयत खराब चल रही है। इंफेक्शन और वायरल की वजह से लगातार परेशानी बनी हुई है।
उनका कहना है कि आसपास के घरों में रहने वाले कई लोग भी बीमार हैं। समस्या का नहीं होता स्थायी समाधान नीलम देवी ने बताया कि पिछले 4-5 महीने से इलाके में गंदा पानी और गंदगी की समस्या है। मच्छर और कीड़े घरों के अंदर तक पहुंच गए हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों को बुखार और मलेरिया जैसी बीमारी हो रही है।
घरों में पानी भरने से खाना बनाने तक में परेशानी होती है। बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। नीलम का कहना है कि अधिकारी और नेता आते हैं, हालात देखते हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता। उन्होंने बताया कि घर में बच्चे भी बीमार हैं और नगर निगम की ओर से ऐसे समय पर दवा का छिड़काव भी नहीं किया गया।
‘5 महीने से नाले का गंदा पानी, सांस लेना भी मुश्किल’ वहीं शक्कर मिल खलवा की रामकली देवी ने बताया कि घर के अंदर से लेकर बाहर तक मेनहोल का गंदा पानी भरा रहा। करीब पांच महीने से परिवार इस परेशानी को झेल रहा है। उन्होंने बताया कि गंदगी और संक्रमण के कारण उनके एक बेटे की मौत भी हो चुकी है।
रामकली के मुताबिक, जलभराव के दौरान घर के आसपास शव रखने तक की जगह नहीं थी। उनका आरोप है कि अधिकारी कई बार निरीक्षण करने आए, फोटो खींचकर ले गए, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। एक महीने तक नगर निगम-जलकल में चलता रहा विवाद स्थानीय लोगों ने बताया कि इस समस्या की शुरुआत 11 जून को हुई थी। उस समय डॉट नाला धंसने से छह मकानों के नीचे मिट्टी का कटान शुरू हो गया था।
नगर निगम ने इन मकानों को नोटिस देकर खाली करने के लिए कहा था। करीब दो महीने में डॉट नाले की मरम्मत कराई गई। लेकिन मरम्मत के करीब चार सप्ताह बाद ही जीटी रोड पर अफीमकोठी के पास डॉट नाला फिर धंस गया। इसके बाद करीब एक महीने तक जलकल और नगर निगम के बीच यह तय नहीं हो सका कि नाले की मरम्मत कौन कराएगा।
इस दौरान गलियों में सीवर का गंदा पानी भरता रहा। पांच साल में पांच जगह धंस चुका है डॉट नाला क्षेत्रीय पार्षद विकास साहू ने बताया कि वार्ड में साल 2022 से अब तक पांच जगह डॉट नाला धंस चुका है। यह करीब 70 साल पुराना नाला है, जो जीटी रोड को पार करते हुए राखी मंडी की ओर जाता है। उनका कहना है कि अफीमकोठी के पास वार्ड-6 क्षेत्र में नाले के ऊपर करीब 50 पक्के मकान भी बन चुके हैं।
ऐसे में नाले की मरम्मत और जलनिकासी की व्यवस्था लगातार चुनौती बनी हुई है। पार्षद ने करीब 15 दिन पहले जलकल महाप्रबंधक को सुझाव दिया था कि शक्कर मिल खलवा स्थित 85/65 सभी गलियों और सड़कों का जंक्शन प्वाइंट है। यहां 12 इंच की सीवर लाइन डालकर 7.5 एचपी के दो पंप लगाए जाएं। भविष्य में जलनिकासी में कोई बाधा आने पर इन पंपों के जरिए पानी की निकासी कराई जा सकेगी।
📡 स्रोत: NewsData.io