छात्रों पर दर्ज मुकदमों को लेकर सरकार की चुप्पी पर भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने उठाए सवाल
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Short Headline: छात्रों पर दर्ज मुकदमों को लेकर सरकार की चुप्पी पर भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने उठाए सवाल
Synopsis: भाजपा के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने छात्रों पर दर्ज गंभीर मुकदमों को वापस लेने के लिए हाईकोर्ट में पहल नहीं करने पर सरकार से सवाल किया। उन्होंने सरकार की नीयत पर भी सवाल उठाए।
Category: Politics Deadline : 07 SEPTEMBER, RANCHI
07 सितंबर, रांची: झारखंड भाजपा के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने छात्र आंदोलन से जुड़े युवाओं पर गंभीर आपराधिक धाराओं में दर्ज मामलों को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल किया कि छात्रों पर हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं लगाने का आधार क्या था और इन मुकदमों को वापस लेने के लिए सरकार हाईकोर्ट में पहल क्यों नहीं कर रही है।
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि केंद्र सरकार और छह अन्य राज्यों ने हाल में दिल्ली के छात्र आंदोलनों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट का रुख कर राहत देने के उदाहरण पेश किए हैं। ऐसे में झारखंड सरकार को भी विधि-सम्मत प्रक्रिया के तहत मामलों की समीक्षा कर अभियोजन वापस लेने या अन्य न्यायिक राहत के लिए हाईकोर्ट में पहल करनी चाहिए।
उन्होंने राज्य सरकार की न्यायालय में पैरवी पर भी सवाल उठाया। प्रतुल शाहदेव ने कहा कि सरकार ने एक आदेश के जरिए दो दर्जन परीक्षाओं के परिणाम रद्द कर दिए, लेकिन आदेश को इतना कमजोर बनाया गया कि नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के तहत हाईकोर्ट से राहत मिल गई। उन्होंने आरोप लगाया कि याचिका के डिफेक्टिव होने के बावजूद सरकार ने इसका प्रभावी विरोध नहीं किया।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि परीक्षा रद्द होने के बाद मंत्रियों ने धरना स्थल पर छात्रों के साथ डांस किया और उन्हें जूस पिलाया। उस समय छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की घोषणाएं भी की गई थीं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का रवैया उसकी नीयत पर सवाल खड़े करता है।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर छात्रों पर दर्ज गंभीर मुकदमों के वापस लेने के लिए हाईकोर्ट में पहल न करने पर सरकार से भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव के सवालों के इर्द-गिर्द घूमती है। सरकार की चुप्पी और नीयत पर उठाए गए सवालों से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा क्षेत्र में न्यायिक प्रक्रिया में देरी हो रही है। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि छात्रों के कानूनी अधिकारों पर असर पड़ रहा है और उनके भविष्य पर भी गहरा प्रभाव हो सकता है। अगर सरकार कार्रवाई नहीं करती, तो इससे छात्रों में असुरक्षा बढ़ेगी और शिक्षा व्यवस्था पर विश्वास