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छत्तीसगढ़ का लोकपर्व पोरा पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 16 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
छत्तीसगढ़ का लोकपर्व पोरा पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया

छत्तीसगढ़ का लोकपर्व पोरा आज प्रदेषभर में पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर किसानों ने अच्छी फसल की कामना के साथ अपने हल और बैलों की पूजा-अर्चना की। बच्चों ने मिट्टी से बने बैल और अन्य खिलौनों का आनंद उठाया। पोरा तिहार, कृषि संस्कृति में पषुधन के महत्व को दर्षाने वाला पर्व है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और परंपरा के प्रतीक लोक-पर्व ‘‘पोरा’’ की सभी प्रदेशवासियों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पोरा हमारे किसान भाइयों के परिश्रम, कृषि संस्कृति और पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन पर्व है।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

पोरा, छत्तीसगढ़ का पारंपरिक लोकपर्व, कृषि समाज में पषुधन के महत्व को दर्शाता है। यह पर्व किसान, पशुपालक और आम जनता के बीच एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करता है। पोरा का मनाना किसानों के लिए फसल की समृद्धि की कामना और पशु पूजा के माध्यम से कृषि के प्रति आस्था को बढ़ाता है, जिससे क्षेत्रीय परंपरा और आर्थिक गतिविधियों में संतुलन बना रहता है। इस खबर का महत्व यह है कि यह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करती है और ग्रामीण समाज की सामाजिक एकता को प्रोत्साहित करती है। पोरा के उत्सव से आम

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।