राज्य

छत्तीसगढ़: सुकमा के पूवर्ती गांव में पहली बार दिवाली का उत्सव

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 7 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
छत्तीसगढ़: सुकमा के पूवर्ती गांव में पहली बार दिवाली का उत्सव

नवंबर 07, नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के सुकमा जिले में स्थित पूवर्ती गांव में इस बार दिवाली का त्योहार खास रहा। कभी नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले इस गांव में पहली बार आजादी के बाद ग्रामीण दिवाली का पर्व मना रहे हैं। दशकों तक नक्सलवाद और हिंसा के साये में रहे पूवर्ती में अब घरों में दीये जल रहे हैं और बच्चे पटाखे फोड़कर त्योहार की खुशियां मना रहे हैं।

कभी नक्सलियों की राजधानी के रूप में पहचान रखने वाले पूवर्ती गांव की तस्वीर अब बदलती नजर आ रही है। जिस इलाके में कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, वहां अब त्योहार का उत्साह देखने को मिल रहा है। गांव की गलियों में रौनक है और लोग परिवार के साथ दीपावली मना रहे हैं। ग्रामीणों के लिए यह बदलाव शांति और सामान्य जीवन की ओर बढ़ते कदम का प्रतीक है।

पूवर्ती के लोगों के लिए यह दिवाली केवल रोशनी और खुशियों का त्योहार नहीं, बल्कि नई उम्मीदों की शुरुआत भी है। ग्रामीण अब अपने बच्चों की शिक्षा, बेहतर भविष्य, रोजगार और गांव के विकास को लेकर सपने देख रहे हैं। लंबे समय तक डर और असुरक्षा के माहौल में रहने वाले लोगों के लिए त्योहार मनाने का यह अवसर विशेष महत्व रखता है।

बस्तर के अंदरूनी इलाकों में बदलती परिस्थितियों के बीच पूवर्ती की यह तस्वीर शांति और सुरक्षा के माहौल के महत्व को भी दर्शाती है। कभी बंदूक और बारूद के लिए पहचाने जाने वाले इस गांव में अब त्योहार, खुशियां और विकास की उम्मीदें नजर आ रही हैं।

पूवर्ती की यह दिवाली बदलाव की एक नई कहानी बयां कर रही है, जहां हिंसा के साये से निकलकर ग्रामीण शांति, खुशहाली और बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

फ़ाइल फ़ोटो

💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर छत्तीसगढ़ के नक्सल-प्रभावित क्षेत्र में पहली बार दिवाली मनाने के बारे में है। यह दर्शाती है कि संघर्ष के बाद भी ग्रामीण जीवन सामान्य हो रहा है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नक्सलवाद से उबरती हुई समुदाय की सहनशीलता और शांति की ओर बढ़ते कदम को दिखाता है। इससे आम जनता को आशा मिलती है कि सुरक्षा और विकास के साथ सांस्कृतिक परंपराएँ फिर से जीवित हो सकती हैं। यह उदाहरण अन्य प्रभावित इलाकों के लिए प्रेरणा बन सकता है, जिससे सामाजिक एकता और आर्थिक सुधार के रास्ते खुलेंगे।

M
Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।