छोटे कोल्ड स्टोर बागवानों के लिए बनेंगे गेम चेंजर: डॉ. बैंस
उपज के बेहतर दाम मिलने की बढ़ेगी संभावना अगस्त 19, शिमला (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश के बागवानों को अपनी उपज के बेहतर भंडारण, उचित बाजार मूल्य और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान से राहत दिलाने के उद्देश्य से हॉलिडे होम, शिमला में ईईएसएल के सौजन्य से ‘कोल्ड स्टोर क्रांति’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में बागवानों के साथ बागवानी विभाग के अधिकारियों तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला की अध्यक्षता अतिरिक्त निदेशक बागवानी डॉ. विद्या प्रकाश बैंस ने की।
डॉ. बैंस ने बताया कि कार्यशाला का आयोजन मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी तथा सचिव बागवानी डॉ. सी. पॉल रासु के मार्गदर्शन और नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक अनिल कुमार चौधरी के नेतृत्व में प्रदेश के बागवानी क्षेत्र को आधुनिक, टिकाऊ और बाजारोन्मुख बनाने के प्रयासों के तहत किया गया है।
उन्होंने बताया कि ऐसी भंडारण सुविधाओं से बागवान तुड़ान के तुरंत बाद अपनी उपज बेचने के लिए मजबूर नहीं होंगे। वे फसल को सुरक्षित रखकर बाजार की मांग और कीमतों के अनुसार बिक्री का समय स्वयं तय कर सकेंगे।
कार्यशाला में आधुनिक एवं टिकाऊ कूलिंग सिस्टम के माध्यम से सेब तथा स्टोन फ्रूट जैसी फसलों के वैज्ञानिक भंडारण की तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान सौर ऊर्जा आधारित कूलिंग सिस्टम के साथ विद्युत एवं थर्मल बैकअप जैसी तकनीकों के बारे में भी प्रस्तुति दी गई।
एचपी-शिवा परियोजना निदेशक डॉ. समीर सिंह राणा, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक विवेक पठानिया सहित विभिन्न ओईएम के प्रतिनिधियों ने कार्यशाला में बागवानों और अधिकारियों को छोटे कोल्ड स्टोर की उपयोगिता, वैज्ञानिक भंडारण तथा बाजार से बेहतर जुड़ाव के संबंध में जानकारी प्रदान की।
अधिकारियों ने बताया कि एकीकृत बागवानी मिशन के तहत 50 प्रतिशत अनुदान पर 5 और 10 मीट्रिक टन क्षमता वाले छोटे कोल्ड स्टोर स्थापित किए जा सकेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छोटे और मध्यम बागवानों तक आधुनिक भंडारण तकनीक पहुंचाना है, ताकि वे अपनी उपज को सुरक्षित रखकर बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बिक्री का निर्णय ले सकें।
विशेषज्ञों ने कहा कि ‘खेत से बाजार तक सुरक्षित उपज, बेहतर भंडारण और बेहतर मूल्य’ की अवधारणा के साथ छोटे कोल्ड स्टोर हिमाचल की बागवानी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।