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चीड़ की पत्तियों से बने कप-प्लेट और बिच्छू बूटी के पास्ता ने कुल्लू दशहरा में खींचा लोगों का ध्यान

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 31 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
चीड़ की पत्तियों से बने कप-प्लेट और बिच्छू बूटी के पास्ता ने कुल्लू दशहरा में खींचा लोगों का ध्यान

जिला कुल्लू के मुख्यालय ढालपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में इस बार पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक उत्पादों से जुड़ी एक अनूठी पहल लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। उत्सव में लगाए गए एक स्टॉल पर चीड़ की पत्तियों से तैयार किए गए कप, प्लेट और कटोरियां लोगों को खूब पसंद आ रही हैं।

इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में उगने वाली बिच्छू बूटी से तैयार पास्ता और कुकीज़ भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।कांगड़ा जिला के धर्मशाला में हिमालय पाइन कंपनी की ओर से ये उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। कंपनी की शुरुआत दो युवाओं अभिनव तलवार और भूमि तलवार ने स्टार्टअप के रूप में की है।

इनका उद्देश्य जंगलों में आग का कारण बनने वाली चीड़ की सूखी पत्तियों का उपयोग कर पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद तैयार करना है। इसके लिए स्थानीय महिला मंडलों से जंगलों में गिरी हुई चीड़ की पत्तियां खरीदी जाती हैं। इसके बाद उन्हें संसाधित कर मशीनों की मदद से कप, प्लेट और कटोरियों का आकार दिया जाता है।

उत्पादों को मजबूती देने के लिए चीड़ के पेड़ से प्राप्त गोंद, सेल्यूलोज और करीब दो प्रतिशत लाइमस्टोन का इस्तेमाल किया जाता है।

हिमालय पाइन कंपनी के इन उत्पादों को बायोडिग्रेडेबल बताया जा रहा है। कंपनी का प्रयास है कि चीड़ की पत्तियों का उपयोग कर जंगलों में आग की समस्या को कम करने में भी योगदान दिया जा सके। गर्मियों के मौसम में सूखी चीड़ की पत्तियों के कारण जंगलों में आग तेजी से फैलती है, जिससे पेड़-पौधों के साथ वन्यजीवों को भी नुकसान पहुंचता है।

ऐसे में इन पत्तियों से उपयोगी उत्पाद तैयार कर उन्हें बाजार तक पहुंचाने की पहल की गई है। कंपनी के उत्पाद विभिन्न स्टॉलों के साथ ऑनलाइन माध्यम से भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।दशहरा उत्सव में इस बार बिच्छू बूटी से तैयार पास्ता और कुकीज़ भी प्रदर्शित किए गए हैं। पास्ता बनाने में मैदा की जगह सूजी का इस्तेमाल किया गया है, जबकि कुकीज़ में भी बिच्छू बूटी और सूजी का प्रयोग किया गया है।

इसके अलावा चीड़ के पेड़ से प्राप्त गोंद, सेल्यूलोज और कोकोनट शुगर की मदद से चॉकलेट और टॉफियां भी तैयार की जा रही हैं। युवाओं का प्रयास है कि लोग जंक फूड के बजाय प्राकृतिक खाद्य उत्पादों को अपने रोजमर्रा के खानपान में शामिल करें।

स्टॉल पर मौजूद युवा अभय भारद्वाज ने बताया कि चीड़ की पत्तियों से कप, प्लेट और कटोरियां तैयार करने का उद्देश्य जंगलों में आग की समस्या से निपटने के साथ पर्यावरण के अनुकूल विकल्प उपलब्ध करवाना है। उन्होंने बताया कि ये उत्पाद बायोडिग्रेडेबल हैं और लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

इनमें इस्तेमाल होने वाले रंग भी प्राकृतिक रूप से उगने वाले फूलों से तैयार किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि बिच्छू बूटी के गुणों को लोगों तक पहुंचाने के लिए इससे पास्ता और कुकीज़ भी तैयार किए गए हैं।वहीं, स्टॉल पर मौजूद युवा अंकुश ने बताया कि यहां आने वाले लोग सबसे अधिक यह जानने में रुचि दिखा रहे हैं कि चीड़ की पत्तियों से कप कैसे बनाए जाते हैं।

उन्हें पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है, ताकि वे इन उत्पादों का रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने कहा कि स्टॉल पर प्राकृतिक चीजों से तैयार कई अन्य उत्पाद भी उपलब्ध हैं और लोगों को इनके उपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।