चिकित्सकों में सेवा और संवेदनशीलता का भाव स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर प्रदाय के लिए अहम : उप मुख्यमंत्री शुक्ल
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‘एक सप्ताह देश के नाम’ अभियान की समीक्षा, मेडिकल कॉलेजों में प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश
भोपाल, 3 सितंबर 2026। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को चिकित्सकीय ज्ञान और तकनीकी दक्षता प्रदान करना नहीं है, बल्कि उनमें सेवा, संवेदनशीलता, मानवीय मूल्यों और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि युवा चिकित्सकों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाकर उन्हें मरीज और उसके परिजनों की भावनाओं को समझने वाला संवेदनशील चिकित्सक बनाना समय की आवश्यकता है।

उप मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में ‘एक सप्ताह देश के नाम’ अभियान की समीक्षा के दौरान कहा कि इसी उद्देश्य से मध्यप्रदेश शासन ने सेवांकुर भारत के साथ एमओयू किया है।
सेवांकुर भारत मेडिकल विद्यार्थियों के बीच कार्य करने वाली संस्था है, जो वर्तमान में देश के 200 से अधिक मेडिकल कॉलेजों और 17 हजार से अधिक विद्यार्थियों से जुड़ी है। संस्था विद्यार्थियों में सेवा, नेतृत्व, संवेदनशीलता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए कार्य कर रही है।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मरीज के लिए डॉक्टर का व्यवहार भी उपचार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। डॉक्टर की मुस्कान, आत्मीय व्यवहार और मरीज से संवेदनशील संवाद कठिन परिस्थितियों में उसके भीतर विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा पैदा कर सकता है।
उन्होंने कहा कि चिकित्सक का अच्छा व्यवहार केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि चिकित्सा सेवा का अहम हिस्सा है। इसलिए मेडिकल शिक्षा के दौरान विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में संवेदना और सेवा-भाव का विकास भी प्राथमिकता होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ‘एक सप्ताह देश के नाम’ अभियान मेडिकल विद्यार्थियों और युवा चिकित्सकों को समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों को करीब से समझने का अवसर प्रदान कर सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और लोगों की अपेक्षाओं से प्रत्यक्ष परिचय विद्यार्थियों में मरीजों के प्रति सहानुभूति के साथ वास्तविक संवेदनशीलता और सेवा की दृष्टि विकसित करने में सहायक होगा।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने, मेडिकल सीटों में वृद्धि और चिकित्सकों की भर्ती पर निरंतर कार्य कर रही है। आने वाले समय में बड़ी संख्या में युवा चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश करेंगे।
ऐसे में जरूरी है कि नई पीढ़ी ज्ञान और तकनीकी दक्षता के साथ सेवा एवं मानवीय मूल्यों से भी समृद्ध हो। उन्होंने कहा कि आज के मेडिकल विद्यार्थी भविष्य में स्वास्थ्य व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ होंगे।
प्रशिक्षण के दौरान समाज से उनका जुड़ाव बढ़ाने और उन्हें सेवा के विभिन्न अवसर उपलब्ध कराने से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को दीर्घकालीन रूप से और बेहतर बनाया जा सकेगा। शुक्ल ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के अधिष्ठाताओं को सेवांकुर भारत के साथ हुए एमओयू को प्रभावी और सतत पहल के रूप में आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
उन्होंने प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में एक कॉलेज प्रतिनिधि नामित करने, सेवांकुर भारत का परिचयात्मक सत्र आयोजित कर विद्यार्थियों को संस्था के उद्देश्यों और गतिविधियों की जानकारी देने तथा इच्छुक विद्यार्थियों को स्वैच्छिक रूप से ‘एक सप्ताह देश के नाम’ अभियान से जोड़ने के लिए प्रेरित करने को कहा।
उन्होंने चयनित विद्यार्थियों के ओरिएंटेशन और कार्यक्रम के समन्वय में मेडिकल कॉलेजों को आवश्यक सहयोग देने तथा सेवांकुर भारत और कॉलेजों के बीच निरंतर एवं सार्थक सहयोग विकसित करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं सेवांकुर भारत के साथ एमओयू की पहल की है।
इसका उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाना और चिकित्सा शिक्षा को समाज एवं सेवा से मजबूती से जोड़ना है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास ऐसी चिकित्सक पीढ़ी तैयार करना है, जिसकी पहचान केवल चिकित्सा विशेषज्ञता से नहीं, बल्कि सेवा भावना, संवेदनशील व्यवहार और सामाजिक जिम्मेदारी से भी हो।
मरीज के प्रति संवेदनशीलता, ग्रामीण एवं वंचित समाज की परिस्थितियों की समझ और सेवा का भाव युवा चिकित्सकों के व्यक्तित्व का स्वाभाविक हिस्सा बने, यही इस पहल की वास्तविक सफलता होगी।
बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सुखवीर सिंह, आयुक्त धनराजू एस, वनवासी कल्याण आश्रम के गिरीश कुबेर, जनजातीय मंत्रणा परिषद, राजभवन के डॉ. रूपनारायण मांडवे, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से डॉ. अश्विनी कुमार तुपकरी, महादेव पड़वल, गौरव शर्मा सहित प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों के अधिष्ठाता उपस्थित रहे।