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चीन में हुई दुर्लभ खोज, 473 मीटर गहराई में मिला 12 करोड़ साल पुराना जीव, तोते जैसी चोंच वाले डायनासोर की जांच में जुटे वैज्ञानिक

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 25 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
चीन में हुई दुर्लभ खोज, 473 मीटर गहराई में मिला 12 करोड़ साल पुराना जीव, तोते जैसी चोंच वाले डायनासोर की जांच में जुटे वैज्ञानिक

China Discovery: चीन में वैज्ञानिकों को जमीन के करीब 473 मीटर नीचे ड्रिलिंग के दौरान करीब 12 करोड़ साल पुराने डायनासोर के जीवाश्म मिले हैं. यह खोज इनर मंगोलिया के गुआइजिहु इलाके में खनिज संसाधनों के सर्वे के दौरान हुई.

खास बात यह है कि पश्चिमी यिंगेन-एजिनाकी बेसिन में डायनासोर के जीवाश्म मिलने का यह पहला रिकॉर्ड बताया जा रहा है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह जीवाश्म शुरुआती क्रेटेशियस काल के एप्टियन युग का है.

यह उत्तरी चीन की प्रागैतिहासिक चट्टानी परत बाइंगोबी फॉर्मेशन के ऊपरी हिस्से में मिला है.

शोधकर्ताओं का मानना है कि इस खोज से इस इलाके में रहने वाले प्राचीन जीवों के बारे में नई जानकारी मिल सकती है.

यह भी पढ़ें: जैसलमेर में मिले डायनासोर से रिलेटिव अवशेष, तालाब खुदाई के दौरान डायनासोर के मिले अवशेष ड्रिलिंग के दौरान मिला दुर्लभ जीवाश्म आमतौर पर डायनासोर के जीवाश्म जमीन की सतह के आसपास चट्टानों की खुदाई से मिलते हैं, लेकिन इस मामले में जीवाश्म ड्रिलिंग कोर से बरामद हुआ.

वैज्ञानिकों के लिए यह खास खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया में ड्रिलिंग के दौरान डायनासोर के जीवाश्म मिलने के मामले बेहद कम हैं.

चीनी जीवाश्म विज्ञानी जिंग लिडा ने ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में इसे पश्चिमी यिंगेन-एजिनाकी बेसिन से डायनासोर का पहला रिकॉर्ड बताया.

उनके मुताबिक, यह खोज इस क्षेत्र में जीवाश्म रिकॉर्ड की एक कमी को पूरा करती है और पश्चिमी इनर मंगोलिया में प्रागैतिहासिक कशेरुकी जीवों की आगे की खोज के लिए नए रास्ते खोल सकती है.

किशोर अवस्था में था डायनासोर वैज्ञानिकों को मिले नमूने में सैक्रल रिब, पूंछ की कई कशेरुकाएं, न्यूरल आर्च, ट्रांसवर्स प्रोसेस और हड्डियों में बदले हुए टेंडन शामिल हैं.

इन हड्डियों के आपस में पूरी तरह विकसित नहीं होने से वैज्ञानिकों का मानना है कि जब इस डायनासोर की मौत हुई, तब वह अभी किशोर अवस्था में था. जीवाश्म से यह भी पता चलता है कि इस जीव की पूंछ लंबी और पतली थी.

इसके मुंह की बनावट तोते की चोंच जैसी थी.

हालांकि जीवाश्म का हिस्सा अधूरा होने के कारण वैज्ञानिक अभी इसकी सटीक प्रजाति की पहचान नहीं कर पाए हैं.

सिटाकोसॉरस से मिलती है बनावट शोधकर्ताओं के मुताबिक, मिले जीवाश्म की बनावट सिटाकोसॉरस से काफी मिलती-जुलती है. सिटाकोसॉरस शुरुआती क्रेटेशियस काल का एक छोटा शाकाहारी डायनासोर था.

इसके मुंह पर तोते जैसी केराटिन की चोंच थी, जिसकी वजह से इसे यह नाम मिला.

सिटाकोसॉरस की लंबाई आमतौर पर करीब एक से दो मीटर होती थी और यह दो पैरों पर चलता था. इसके जीवाश्म चीन, मंगोलिया और साइबेरिया के अलग-अलग इलाकों में पाए जा चुके हैं.

हालांकि नई खोज को अभी सीधे सिटाकोसॉरस की किसी खास प्रजाति से नहीं जोड़ा गया है.

जीवाश्म के अधूरे होने के कारण वैज्ञानिक फिलहाल इसे अनिर्धारित ऑर्निथिशियन डायनासोर का नमूना मान रहे हैं.

पश्चिमी चीन में डायनासोर की मौजूदगी का नया सबूत इस खोज की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ इसकी गहराई या उम्र नहीं है.

इससे यह संकेत मिलता है कि शुरुआती क्रेटेशियस काल में पश्चिमी इनर मंगोलिया के इस हिस्से में भी डायनासोर मौजूद थे.

इससे पहले इस बेसिन में डायनासोर से जुड़ी खोजें मुख्य रूप से इसके पूर्वी हिस्से तक सीमित थीं. बाइंगोबी फॉर्मेशन में शुरुआती क्रेटेशियस काल के कई जीवों के जीवाश्म मिले हैं.

नई खोज इस क्षेत्र में डायनासोर के ज्ञात भौगोलिक फैलाव को और पश्चिम की ओर बढ़ाती है.

वैज्ञानिकों के लिए यह नमूना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चीन के इस हिस्से के प्राचीन पर्यावरण और यहां रहने वाले जीवों को समझने में मदद कर सकता है.

शोधकर्ताओं ने दिया ' जियान चांगमाएंसिस' नाम शोधकर्ताओं ने इस डायनासोर को जियान चांगमाएंसिस नाम दिया है.

इसके नाम का पहला हिस्सा 'जियान' चीनी पौराणिक कथाओं में बताए गए एक पंख वाले पक्षी से लिया गया है. यह नाम डायनासोर की पक्षी जैसी शारीरिक बनावट को दर्शाता है.

वहीं, 'चांगमाएंसिस' नाम उस चांगमा बेसिन के सम्मान में रखा गया है, जहां इस जीव का जीवाश्म मिला था. यह भी पढ़ें: अर्जेंटीना में मिला नया डायनासोर, विशाल पंजों से करता था शिकार

📡 स्रोत: NewsData.io

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