चीन ने हटाया नेपाल बाढ़ का वीडियो? 676 मौतों के बाद ड्रैगन क्यों कर रहा ऐसा

नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ के बाद चीन पर बाढ़ से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया से हटाने का आरोप लगा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थानीय लोगों और पत्रकारों की ओर से शेयर किए गए कुछ वीडियो चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दिए गए. इन वीडियो में बाढ़ से हुई तबाही और भूस्खलन के दृश्य दिखाई दे रहे थे.
इस बीच नेपाल और तिब्बत में बाढ़ और अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 676 हो गई है. करीब 3,000 लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी सामने आई है. नेपाल में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, जबकि तिब्बत में भी जान-माल का नुकसान हुआ है.
A massive mudslide struck Gyirong Port on the China-Nepal border, with CCTV footage showing a wall of debris slamming through the crossing in seconds, tossing vehicles and buses.
Nepal reports at least 8-16 dead with hundreds of travelers listed as missing, including 291... pic.twitter.com/ZXfDIUaGsC — Clash Report (@clashreport) August 26, 2026 बाढ़ के वीडियो हटाने का आरोप
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, लोगों की ओर से रिकॉर्ड किए गए और इंटरनेट पर डाले गए कुछ वीडियो चीनी सोशल मीडिया से हटा दिए गए. इनमें तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में एक बॉर्डर क्रॉसिंग के पास हुए भूस्खलन का वीडियो भी शामिल बताया गया है.
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के सरकारी मीडिया ने अपनी खबर में वीडियो की जगह सिर्फ एक तस्वीर का इस्तेमाल किया. सरकारी मीडिया की रिपोर्ट में बाढ़ से हुए नुकसान की तुलना में राहत और बचाव के काम पर ज्यादा ध्यान दिया गया. चीन ने राहत और बचाव टीम भेजी
चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार, बाढ़ प्रभावित इलाकों में ड्रोन और हेलीकॉप्टर की मदद से बचाव अभियान चलाया जा रहा है. चीनी सेना और दूसरे आपातकालीन कर्मचारियों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया है.
पीपुल्स डेली के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ग्यिरोंग में प्रभावित लोगों की मदद के लिए हर संभव प्रयास करने का आदेश दिया है. विदेशी पत्रकारों के सामने भी मुश्किलें
रिपोर्ट्स के मुताबिक, विदेशी पत्रकारों को तिब्बत जाने और वहां के लोगों से सीधे बात करने में कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है. इसकी वजह से बाढ़ से हुए नुकसान की स्वतंत्र जानकारी जुटाना मुश्किल हो रहा है. तिब्बत चीन का एक बेहद संवेदनशील इलाका माना जाता है.
लंदन स्थित SOAS यूनिवर्सिटी के चाइना इंस्टीट्यूट के निदेशक स्टीव त्सांग ने द गार्जियन से कहा कि तिब्बत से जुड़ी खबरों को चीन में राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखा जाता है. नेपाल के पूर्व सांसद राजेंद्र बजगैन ने भी चीन में बाढ़ की जानकारी को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं.
उन्होंने कहा कि अगर बाढ़ के वीडियो हटाए जा रहे हैं तो इससे यह सवाल उठता है कि आखिर क्या जानकारी सामने आने से रोकी जा रही है. नेपाल में सबसे ज्यादा तबाही नेपाल में इस आपदा का असर बेहद गंभीर रहा है. नेपाल की आपदा एजेंसी के अनुसार 669 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 2,426 लोग अब भी लापता हैं.
राहत और बचाव दल अब तक 3,700 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा चुके हैं. चीन की ओर से तिब्बत में सात लोगों की मौत और 550 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है. इस तरह नेपाल और तिब्बत को मिलाकर मृतकों की संख्या 676 तक पहुंच गई है.
हालांकि, लापता लोगों के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है. ग्लेशियर टूटने से बढ़ा था पानी अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण UGS के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बुधवार को पानी का अचानक बढ़ना ग्लेशियर टूटने की घटना से जुड़ा था.
इसके बाद नदियों में पानी का बहाव तेजी से बढ़ा और कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पैदा हो गई.
📡 स्रोत: NewsData.io