चीन पहुंचे भारत के 16 व्यापारी, फिर भी कारोबार बंद:नया सामान ले जाने की नहीं मिली परमिशन, गुंजी में व्यापारियों को करोड़ों का माल फंसा
6 साल बाद लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार शुरू होने की उम्मीद जगी तो सीमांत क्षेत्र के व्यापारियों ने लाखों-करोड़ों रुपए का माल खरीदकर गुंजी पहुंचा दिया। लेकिन व्यापार शुरू होते ही नई परेशानी खड़ी हो गई।
चीन ने पहले चरण में सिर्फ उन्हीं व्यापारियों को तकलाकोट जाने की मंजूरी दी, जिनका सामान साल 2019 में व्यापार बंद होने के बाद वहीं रह गया था। इन 16 व्यापारियों को भी नया माल लेकर जाने की अनुमति नहीं मिली।
अब तकलाकोट पहुंचे व्यापारी कारोबार करने के बजाय अपने पुराने सामान की स्थिति देखने और आगे की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर गुंजी में 50 से ज्यादा व्यापारी चीन की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि व्यापार का सीजन जून से अक्टूबर तक ही रहता है।
अगस्त खत्म होने को है और व्यापारियों का करोड़ों रुपए का माल गुंजी में रखा है। लगातार बारिश और खराब मौसम में सामान खराब होने का डर है। ऐसे में अनुमति में और देरी हुई तो छह साल बाद शुरू हुआ व्यापार इस साल भी उम्मीद के मुताबिक नहीं चल पाएगा।
पुराने माल वाले 16 व्यापारियों को ही पहले भेजा साल 2019 में व्यापार बंद होने के बाद कई भारतीय व्यापारियों का सामान तकलाकोट मंडी में ही रह गया था। चीन ने पहले चरण में करीब 16 ऐसे व्यापारियों को सीमा पार करने की अनुमति दी है।
व्यापारियों को उम्मीद थी कि इस बार मंडी खुलने पर वे पुराना माल निकालने के साथ नया सामान भी लेकर जाएंगे। लेकिन चीन की ओर से नए माल के साथ जाने की अनुमति नहीं दी गई। इससे व्यापारी तकलाकोट पहुंचकर भी नया कारोबार शुरू नहीं कर पा रहे हैं। छह साल बाद भी वही इंतजार लिपुलेख व्यापार सिर्फ खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है।
यह पिथौरागढ़ के सीमांत इलाके में रहने वाले रं समाज की पुरानी आर्थिक गतिविधि है। व्यापार बंद रहने के छह साल में स्थानीय कारोबारियों को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ। इस साल व्यापार खुलने की उम्मीद में कई व्यापारियों ने अपनी जमा पूंजी लगाई और कुछ ने उधार लेकर सामान खरीदा।
अब सामान गुंजी पहुंच चुका है, लेकिन चीन की मंजूरी नहीं मिलने से पैसा माल के रूप में अटका हुआ है। गुंजी में 50 से ज्यादा व्यापारी इंतजार में तकलाकोट जाने के लिए 50 से ज्यादा व्यापारी अब भी गुंजी में हैं। उन्होंने चीन को भेजे जाने वाला सामान पहले ही वहां पहुंचा दिया है। इसमें गुड़
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar