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चीन के रूट से हट रहे इंटरनेट केबल:अब ये हिंद महासागर में बिछ रहे, भारत को फायदा; दुनिया का 99% डेटा समुद्र के नीचे चलता है

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
चीन के रूट से हट रहे इंटरनेट केबल:अब ये हिंद महासागर में बिछ रहे, भारत को फायदा; दुनिया का 99% डेटा समुद्र के नीचे चलता है

दुनिया भर में इंटरनेट का 99% डेटा समुद्र के नीचे बिछे केबलों के जरिए चलता है। पिछले दस सालों तक चीन के पास मौजूद दक्षिण चीन सागर और लाल सागर इसके मुख्य रास्ते थे। लेकिन युद्ध, तनाव और लालफीताशाही के कारण अब कंपनियां इन रास्तों से बच रही हैं। नए इंटरनेट केबल सीधे हिंद महासागर से बिछाए जा रहे हैं, ताकि एआई जैसी सेवाओं के लिए बिना रुकावट तेज इंटरनेट मिल सके। इस बड़े बदलाव से भारत को बड़ा फायदा हो रहा है और मुंबई के बाद अब चेन्नई भी दुनिया का नया बड़ा इंटरनेट हब बन रहा है। भारत साउथ एशिया में सुरक्षित ‘डिजिटल हब’ बनकर उभर रहा भारत द.

एशिया में सुरक्षित ‘डिजिटल हब’ बनकर उभर रहा है। लक्षद्वीप सागर का केबल कॉरिडोर के रूप में महत्व बढ़ने से भारत को हिंद महासागर में नई रणनीतिक बढ़त मिलेगी। साथ ही, वैश्विक टेक कंपनियों के भारी निवेश और बेहतर डिजिटल कनेक्टिविटी के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे। किसी देश की अर्थव्यवस्था को बना सकता है अपाहिज सबमरीन केबल्स दुनिया के 99% इंटरनेट ट्रैफिक को संभालते हैं, जिसके बिना वैश्विक बैंकिंग, संचार व अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी।

आने वाले समय में एआई, क्लाउड डेटा और सुपरकंप्यूटिंग की भारी जरूरतों के कारण इनकी रणनीतिक अहमियत और कई गुना बढ़ेगी। यह स्थिति एक ‘अदृश्य युद्ध’ जैसी ही है, जहां किसी देश के केबल काट देना बिना मिसाइल चलाए उसकी अर्थव्यवस्था को अपाहिज बना सकता है। सबमरीन केबल कैसे काम करती है?

फाइबर ऑप्टिक तकनीक: सबमरीन केबल बिजली के तारों जैसी नहीं होतीं। इनमें बेहद पतले ग्लास फाइबर होते हैं, जिनसे डेटा लाइट पल्स के रूप में हजारों किलोमीटर तक जाता है। रिपीटर: लंबी दूरी में सिग्नल कमजोर न हो, इसलिए केबल में जगह-जगह रिपीटर लगाए जाते हैं। इन्हें केबल के अंदर मौजूद धातु की परत के जरिए बिजली मिलती है। सुरक्षा: केबल को समुद्र के दबाव और नुकसान से बचाने के लिए कई सुरक्षात्मक परतों से ढका जाता है। तट के पास इन्हें ज्यादा मजबूत बनाया जाता है और कई जगह समुद्र तल में दबाया जाता है। सबमरीन केबल कटने पर क्या होता है?

इंटरनेट पूरी तरह बंद नहीं होता। केबल कटने पर डेटा दूसरी केबलों से भेज दिया जाता है। इसे नेटवर्क रिडंडेंसी कहते हैं। कंपनियां डेटा ट्रैफिक को कई केबलों में बांटकर रखती हैं, ताकि एक केबल खराब होने पर दूसरी काम कर सके। जहां केबल कम होती

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

इंटरनेट का 99% डेटा समुद्र के नीचे बिछे केबलों से होकर गुजरता है, जिनमें से अधिकांश चीन के दक्षिण चीन सागर और लाल सागर के मार्गों पर निर्भर थे। हाल ही में भू-राजनीतिक तनाव और लालफीताशाही के कारण कंपनियाँ इन रास्तों से बच रही हैं और सीधे हिंद महासागर में नए केबल बिछा रही हैं। यह बदलाव विश्वभर के डेटा ट्रैफ़िक को अधिक सुरक्षित और तेज बनाता है, विशेषकर एआई और क्लाउड सेवाओं के लिए। भारत को इस नई अवसंरचना से लाभ मिलेगा, क्योंकि उसके बंदरगाहों और नेटवर्क को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। आम जनता के लिए इसक

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