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चीन सीमा तक हथियार पहुंचाने सेना का नया रास्ता:हिमाचल की ओर से 298km की दूरी; लद्दाख में एक सप्लाई कॉरिडोर पर निर्भरता खत्म होगी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 4 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
चीन सीमा तक हथियार पहुंचाने सेना का नया रास्ता:हिमाचल की ओर से 298km की दूरी; लद्दाख में एक सप्लाई कॉरिडोर पर निर्भरता खत्म होगी

लद्दाख में चीन से लगी एलएसी तक सेना अपनी सप्लाई व्यवस्था मजबूत कर रही है। मकसद है कि किसी सड़क, पुल या सप्लाई रूट के बंद होने पर भी हथियार, गोला-बारूद, ईंधन और राशन की आपूर्ति जारी रहे। इसके लिए लद्दाख को देश से जोड़ने वाले रास्तों के साथ अंदरूनी इलाकों में भी वैकल्पिक मार्ग तैयार किए जा रहे हैं।

अभी लद्दाख पहुंचने के दो प्रमुख रास्ते हैं- श्रीनगर-करगिल-लेह और मनाली-लेह। करीब 298 किमी लंबा निमू-पदम-दरचा मार्ग तीसरा प्रमुख रास्ता बन रहा है। शिंकुन ला पर करीब 4.1 किमी लंबी सुरंग बनने के बाद यह सालभर चलने वाला मार्ग बन सकेगा। वहीं, जोजिला सुरंग से श्रीनगर-करगिल-लेह मार्ग की हर मौसम में कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

लद्दाख के भीतर हनुथांग-तुरतुक, खाल्त्से-बटालिक और करगिल-दुमगिल जैसे वैकल्पिक लिंक तैयार किए जा रहे हैं। खारदुंग ला और बटालिक में सुरंग परियोजनाओं पर भी काम आगे बढ़ रहा है। अब सेना की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में ड्रोन हमलों से सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

इसके लिए काउंटर-ड्रोन सिस्टम, निगरानी, सुरक्षित संचार और फॉरवर्ड स्टोरेज की सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। 298km के तीसरे रास्ते से हिमाचल की ओर से लद्दाख पहुंचने की राह खुल जाएगी 1. लद्दाख में सेना नई व्यवस्था क्यों बना रही?

ताकि किसी एक सड़क, पुल या सप्लाई रूट के बंद होने पर भी सेना तक हथियार, ईंधन, राशन और दूसरी जरूरी सामग्री पहुंचती रहे। 2. मल्टी-रूट नेटवर्क का मतलब क्या है? एक महत्वपूर्ण सैन्य क्षेत्र तक पहुंचने के लिए एक से ज्यादा रास्ते तैयार रखना। एक रास्ता बंद हो तो दूसरा इस्तेमाल किया जा सके। 3. निमू-पदम-दरचा मार्ग क्यों अहम है?

करीब 298 किमी लंबा यह मार्ग हिमाचल की ओर से जांस्कर होते हुए लद्दाख पहुंचता है। इससे लद्दाख को अलग दिशा से संपर्क मिलेगा। 4. जोजिला सुरंग आखिर क्यों महत्वपूर्ण? जोजिला सर्दियों में भारी बर्फबारी से प्रभावित होता है।

सुरंग बनने से श्रीनगर-करगिल-लेह मार्ग पर सालभर आवाजाही बेहतर हो सकेगी। 5. परियोजनाओं पर कितना खर्च हो रहा? रक्षा सूत्रों के अनुसार, करगिल-लेह-लद्दाख क्षेत्र में करीब 18 हजार करोड़ रुपए की सड़क और सुरंग परियोजनाओं पर अभी काम चल रहा है। 6. विंटर स्टॉकिंग पर क्या असर होगा?

अभी सर्दियों से पहले ऊंचाई वाले इलाकों में राशन, ईंधन और दूसरी सामग्री बड़े पैमाने पर जमा कर

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

चीन के साथ सीमा पर हथियार पहुँचाने के लिए भारत ने हिमाचल प्रदेश से 298 किमी का नया वैकल्पिक मार्ग तैयार किया है, जिससे लद्दाख की सप्लाई कॉरिडोर पर निर्भरता घटेगी। यह कदम लद्दाख में सैन्य तैनाती को मजबूत करने के लिए उठाया गया है, ताकि किसी भी सड़क, पुल या मार्ग के बंद होने पर भी हथियार, गोला-बारूद, ईंधन और राशन की आपूर्ति सुचारू बनी रहे। इस खबर का महत्व यह है कि यह भारत की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाता है और संभावित संघर्ष स्थितियों में रणनीतिक लचीलापन सुनिश्चित करता है। आम जनता के लिए इसका असर यह है

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