चीनी-चावल और दाल फिर हुई महंगी, दीवाली से पहले सप्लाई चेन में बड़ी रुकावट
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त्यौहारों का मौसम आते ही जहां एक तरफ खर्च बढ़ जाता है, तो वहीं दूसरी ओर इस बार महंगाई ने भी अपने पैर पसार लिए हैं.
खाने- पीने की चीजों के दाम लगातार इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं कि दीवाली पर दिया जलाना भी मुश्किल लग रहा है.
हाल ही में दुनियाभर में चावल, चीनी, दाल, खाने के तेल और कपास जैसी चीजों के दाम तेजी से बढ़ने की खबरें आ रही हैं.
इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण खराब मौसम, मिडिल-ईस्ट तनाव और सामान की ढुलाई महंगी होना बताया जा रहा है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर के आसपास तनाव के कारण सामान की सप्लाई भी काफी गड़बड़ हुई है.
चावल की कीमत ने तोड़ा दो साल का रिकॉर्ड
दुनियाभर में चावल की कीमतों ने पिछले दो साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है.
इसकी वजह बाजार में चावल की सप्लाई कम होना और सप्लाई के लिए लागत ज्यादा लगना है.
कंटेनर से सामान भेजने का खर्च पांच हजार डॉलर से बढ़कर करीब पचपन हजार डॉलर तक पहुंच गया है.
खाद्य एवं कृषि संगठन के मुताबिक, दुनिया में चावल का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 2.4% घट सकता है.
भारत में भी चावल का उत्पादन 6.5% घटकर 15.4 करोड़ टन से 14.4 करोड़ टन रहने का अनुमान है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल के वायदा भाव 30% से 70% तक बढ़ चुके हैं.
चीनी का उत्पादन कम और कीमत ज्यादा
चीनी की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है. अक्टूबर में कच्ची चीनी के वायदा भाव करीब 8% बढ़े हैं.
वहीं जुलाई के निचले स्तर से इनकी कीमतों में लगभग 40% की बढ़ोतरी हुई है.
ब्राजील, भारत, थाईलैंड और यूरोपीय संघ में खराब मौसम के कारण चीनी का उत्पादन 10% से 20% तक घटने की आशंका है. यूरोपीय संघ में 19% और थाईलैंड में 17% तक उत्पादन घट सकता है.
खाने का तेल भी महंगा कच्चे तेल की कीमतों के चलते बायो फ्यूल की मांग बढ़ रही है.
बायो फ्यूल बनाने के लिए अब दुनियाभर में इस्तेमाल होने वाले कुल वनस्पति तेल का करीब 27% हिस्सा खर्च हो रहा है.
अमेरिकी कृषि विभाग का अनुमान है कि बायो फ्यूल के लिए वनस्पति तेल का इस्तेमाल 30% से 32% तक बढ़ सकता है. जिसका अस
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar