चीनी कीमतों पर लगाम, 10 लाख टन शुल्क-मुक्त आयात मंजूर

अगस्त 24, नई दिल्ली: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चीनी की कीमत 20 जुलाई को 48.18 रुपये प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई।
सरकार के अनुसार, कीमतों में बढ़ोतरी की मुख्य वजह इथेनॉल के लिए चीनी का डायवर्जन नहीं, बल्कि उत्पादन में कमी, त्योहारी मांग, मौसम के कारण फसल को नुकसान, वैश्विक आपूर्ति में कमी और जमाखोरी है। इस साल चीनी उत्पादन का अनुमान 343 लाख मीट्रिक टन से घटकर करीब 306 लाख मीट्रिक टन रह गया है।
वहीं, इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का डायवर्जन 2022-23 में 12 प्रतिशत था, जो 2025-26 में घटकर करीब 9 प्रतिशत रह गया है। यानी कीमतों में मौजूदा तेजी के लिए इथेनॉल डायवर्जन को मुख्य कारण नहीं माना जा रहा है। कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने 30 नवंबर तक कारोबारियों के लिए 400 टन की स्टॉक सीमा तय की है।
इसके अलावा बल्क उपभोक्ताओं के लिए 15 दिनों की खपत के बराबर स्टॉक रखने की सीमा निर्धारित की गई है। सरकार ने स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी शुरू कर दिया है। घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है।
साथ ही चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की सलाह दी गई है। सरकार को उम्मीद है कि अक्टूबर में चीनी उत्पादन 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक रहेगा।
सरकार का कहना है कि अक्टूबर तक घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीनी का स्टॉक उपलब्ध है और बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम लगातार उठाए जा रहे हैं। फ़ाइल फ़ोटो