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चित्रकूट में कैमोमाइल-लेमनग्रास खेती से किसानों की आय बढ़ी:सिलखोरी में लगेगी ऑयल एक्सट्रैक्शन यूनिट, मिलेगा सीधा बाजार

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 25 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
चित्रकूट में कैमोमाइल-लेमनग्रास खेती से किसानों की आय बढ़ी:सिलखोरी में लगेगी ऑयल एक्सट्रैक्शन यूनिट, मिलेगा सीधा बाजार

चित्रकूट में किसानों, विशेषकर महिला स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ाने के लिए औषधीय और सुगंधित फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को विकासखंड कर्वी की ग्राम पंचायतों घूरेटनपुर, बंदरी और सिलखोरी में कैमोमाइल व लेमनग्रास की खेती का निरीक्षण किया गया।

इस दौरान फसलों की स्थिति, किसानों की आय और भविष्य की संभावनाओं का आकलन किया गया। एचसीएल फाउंडेशन के सहयोग से यूपी राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने रबी सीजन में कैमोमाइल की खेती शुरू की थी।

जिले के घूरेटनपुर, मानपुर, मुकुंदपुर, बंदरी, बराज और हरिहरपुर में कुल 2.5 एकड़ क्षेत्र में इसकी खेती की गई। किसानों को पहले ही साल 10 बिस्वा में लगभग 22 से 25 हजार रुपए तक की आय प्राप्त हुई है, जिससे उनमें इस फसल के प्रति उत्साह बढ़ा है।

लेमनग्रास की खेती के लिए 25 एकड़ में एक प्रदर्शन कार्यक्रम शुरू किया गया था, जिसमें से वर्तमान में 12 एकड़ में फसल सुरक्षित है। महिला किसानों को पहली कटाई से 10 बिस्वा में लगभग 2 हजार रुपए की आय हुई। अब फसल दूसरी कटाई के लिए तैयार हो रही है, जिसकी कटाई अक्टूबर में होने के बाद प्रसंस्करण की तैयारी की जाएगी।

पहली कटाई की उपज सीधे खरीदारों को बेची गई थी। अब एचसीएल फाउंडेशन ग्राम सिलखोरी में एक ऑयल एक्सट्रैक्शन यूनिट स्थापित कर रहा है। इससे किसान लेमनग्रास से तेल निकालकर सीधे बाजार में बेच सकेंगे। लेमनग्रास तेल की कीमत लगभग 1000 रुपए प्रति किलोग्राम है।

एक साल में 3 से 4 कटाई से प्रति एकड़ लगभग 50 से 60 लीटर तेल निकलता है, जिसका अर्थ है कि 10 बिस्वा से सालभर में 15 से 20 लीटर तेल प्राप्त हो सकता है। एक बार लगाई गई फसल 3 से 4 साल तक उत्पादन देती है।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बीज, पौध और स्लिप्स की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण दिलाने के निर्देश दिए। भविष्य में दलहन उत्पादन बढ़ाने पर भी कार्य किया जाएगा।

इस भ्रमण में उपायुक्त रोजगार सुखराज बंधु, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक उत्तम कुमार त्रिपाठी और अजय पाल, जिला मिशन प्रबंधक दिलीप कुमार, ब्लॉक मिशन प्रबंधक पंकज शर्मा, एचसीएल फाउंडेशन के सौरभ पांडे सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

संस्था ने अरहर की बहार किस्म का बीज उपलब्ध कराया है, जबकि रबी में उकठा-रोधी उन्नत चने की किस्में कृषि विश्वविद्यालयों या अनुसंधान संस्थानों से लेने की सलाह दी गई।

📡 स्रोत: NewsData.io

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