चित्रकूट में कपड़ा व्यवसायी राम अग्रवाल का मरणोपरांत नेत्रदान:दो लोगों को मिलेगी रोशनी, बेटों ने कहा- उनकी आंखों से दुनिया देखेंगे दूसरे
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →चित्रकूट के पुरानी बाजार कर्वी निवासी कपड़ा व्यवसायी राम अग्रवाल के निधन के बाद उनके परिवार ने मरणोपरांत नेत्रदान किया। उनके बेटों पुनीत अग्रवाल और विनीत अग्रवाल ने परिवार की सहमति से पिता की आंखें दान कराईं। सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय चित्रकूट की आई बैंक टीम ने सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की।
पुनीत और विनीत अग्रवाल ने बताया कि उनके पिता और पूरे परिवार की इच्छा थी कि मृत्यु के बाद भी उनकी आंखें किसी जरूरतमंद के काम आएं। उन्होंने कहा, "हम पिता को जिंदा नहीं कर सकते, लेकिन नेत्रदान के जरिए उनकी आंखों को जिंदा रख सकते हैं। उनकी आंखों से दो या उससे अधिक लोग इस दुनिया को देख सकेंगे।
इससे बड़ा पुण्य क्या हो सकता है।" परिजनों ने बताया कि इस नेक काम के लिए रिश्तेदार हरिप्रकाश अग्रवाल और सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय के वरिष्ठ कार्यकर्ता आरबी सिंह चौहान ने भी उन्हें प्रेरित किया। इसके बाद परिवार ने अस्पताल के आई बैंक को सूचना दी। मेडिकल टीम ने मौके पर पहुंचकर जरूरी प्रक्रिया पूरी की।
सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय की टीम के अनुसार, दान की गई आंखों से दो या उससे अधिक जरूरतमंद लोगों को रोशनी मिलने की संभावना है। परिवार के इस फैसले को इलाके के लोगों के लिए प्रेरणादायक बताया गया। सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय के निदेशक और ट्रस्टी डॉ.
इलेश जैन ने राम अग्रवाल की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि नेत्रदान बहुत ही पुनीत कार्य है। समाज के हर व्यक्ति को इसके लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नेत्रदान को लेकर समाज में फैली गलतफहमियों और पुरानी सोच को दूर करने के लिए जागरूकता जरूरी है। अगर लोग इस मकसद के साथ आगे आएं, तो समाज और देश में अंधेपन को कम करने में मदद मिल सकती है। नेत्रदान के बाद अग्रवाल परिवार ने इसे अपने लिए गर्व का पल बताया।
📡 स्रोत: NewsData.io