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चित्रकूट में तीन दिन में दूसरी बाढ़:गर्भवती बोली- सब बर्बाद हो गया, जो मिल जा रहा वही खा रहे; छतों पर लोग फंसे

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 2 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
चित्रकूट में तीन दिन में दूसरी बाढ़:गर्भवती बोली- सब बर्बाद हो गया, जो मिल जा रहा वही खा रहे; छतों पर लोग फंसे

चित्रकूट में मलबे की मिट्टी अभी धुल भी नहीं पाई थी कि 1 सितंबर को फिर बाढ़ आ गई। तीन दिन में दूसरी बार आई बाढ़ ने चित्रकूट में लोगों की बची-खुची गृहस्थी भी लील ली। 29 अगस्त की बाढ़ के निशान लोग मिटा भी नहीं पाए थे कि दोबारा पानी ने घरों और दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया।

दैनिक भास्कर की टीम बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंची और लोगों के बीच रहकर हालात देखे। 10 तस्वीरों में देखें बाढ़ के हालात… पुराने बस स्टैंड के पास किराए के कमरे में रहने वाली 7 माह की गर्भवती किरण रुंधे गले से कहती हैं- कुछ भी नहीं बचा, सब बर्बाद हो गया।

अचानक पानी आ गया तो बाल-बच्चों को लेकर जान बचाने के लिए घर में ताला लगाकर भागे। मेरा बच्चा दूसरी तरफ था। वह तैरकर पड़ोसी की छत पर पहुंचा, तब उसकी जान बची। यह देखकर हम रोते रहे। अब कुछ नहीं कर सकते, जहां जो मिल रहा है, वही खाकर जी रहे हैं चित्रकूट में बाढ़ प्रभावित हर घर की कहानी कमोवेश ऐसी ही है।

कहीं लोग घरों में जमा सिल्ट साफ कर रहे हैं तो कहीं दुकानदार खराब सामान बाहर निकाल रहे हैं। किसी को कर्ज चुकाने की चिंता है तो किसी को अगली बारिश और फिर बाढ़ का डर। तीन दिन में दूसरी बार बाढ़, 500 दुकानें डूबीं सोमवार देर रात से शुरू हुई तेज बारिश मंगलवार सुबह 9 बजे तक जारी रही।

पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के चलते मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, नदी का जलस्तर हर घंटे एक मीटर बढ़ रहा था। सुबह करीब 6 बजे तक रामघाट और राघव प्रयाग घाट किनारे की लगभग 500 दुकानें जलमग्न हो गईं।

देखते ही देखते रामघाट और पुरानी लंका तिराहे से कामतानाथ जाने वाली सड़क और सियाराम कुटीर तक नावें चलने लगीं। दुकानें, मकान, मठ और मंदिर पानी में डूब गए। लोगों ने छतों पर चढ़कर अपनी जान बचाई। सुबह लोग ठीक से सोकर उठ भी नहीं पाए थे कि बाढ़ आ गई। दुकानदार अपना सामान नहीं बचा सके।

घरों में रखा गृहस्थी का सामान भी पानी में डूब गया। सुबह 10 बजे के बाद बारिश थमी तो बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा। दोपहर बाद सड़कों से पानी उतर गया, लेकिन घाट जलमग्न रहे। पानी उतरा तो लोग अपने घर और दुकानें समेटने लगे पानी उतरने के साथ ही घरों में महिलाएं और बच्चे गृहस्थी के सामान पर जमी परत साफ करने में जुट गए।

दूसरी ओर व्यापारी दुकानें खोलकर अपनी बर्बादी देखते रहे। लोग बाढ़

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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