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CISF जवान ने साथियों पर गोली चलाई, 4 की मौत:जम्मू के कठुआ में विवाद के बाद फायरिंग; आपसी झगड़ों में 5 साल में 24 मौतें

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 30 सितंबर 2026 👁️ 2 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
CISF जवान ने साथियों पर गोली चलाई, 4 की मौत:जम्मू के कठुआ में विवाद के बाद फायरिंग; आपसी झगड़ों में 5 साल में 24 मौतें

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में CISF जवान ने अपने साथियों पर गोली चला दी। मंगलवार शाम 7.30 बजे हुई इस घटना में 4 CISF जवानों की मौत हो गई। मृतकों में एक असिस्टेंट कमांडेंट भी शामिल हैं। इनके नाम असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, एसआई लक्ष्मण सिंह, कॉन्स्टेबल रफीक अहमद और कॉन्स्टेबल संदीप कुमार हैं।

ये जवान हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे बसोहली के पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात थे। दो जवानों के बीच बहस हुई, इसी दौरान एक ने फायरिंग कर दी। कठुआ पुलिस ने आरोपी जवान को गिरफ्तार कर लिया है। CISF के सीनियर अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं। आरोपी के पास AK-47 राइफल और 150 गोलियां थीं सूत्रों के मुताबिक, आरोपी हेड कॉन्स्टेबल अभिदेश कुमार सिंह ने ऑफिस के परिसर में घुसकर अपनी सरकारी AK-47 राइफल से अंधाधुंध फायरिंग की।

उनके पास 150 राउंड गोलियां थीं। आरोपी 2009 बैच का है, CISF हेडक्वॉर्टर ने मामले की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दिए हैं। जहां जवानों की तैनाती थी, वो प्रोजेक्ट 12 साल से बंद सेवा-3 प्रोजेक्ट बसोहली तहसील में रावी नदी पर बना है। इसे 1993 में शुरू किया गया था। 2013 की बाढ़ में इसका 300 मीटर लंबा हिस्सा बह गया था।

तब से ये पूरी तरह बंद है।

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📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

कठुआ में CISF जवानों के बीच झगड़े के बाद एक जवान ने अपने साथियों पर गोली चलाई, जिससे 4 लोगों की मौत हो गई। यह घटना जम्मू के सुरक्षा ढांचे में गड़बड़ी को उजागर करती है और पुलिस व सुरक्षा बलों के बीच विश्वासघात के सवाल उठाती है। ऐसी घटना से आम जनता में सुरक्षा व्यवस्था पर संदेह बढ़ सकता है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और नागरिकों के दैनिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

किसी भी विवाद को शांतिपूर्ण मार्ग से सुलझाना ही समाज की मूलभूत जिम्मेदारी है। गुस्से में आकर हिंसा का सहारा लेने से न केवल जीवन का नुकसान होता है, बल्कि समाज में भय और अविश्वास की परतें गहरी हो जाती हैं। हमें संवाद, सहानुभूति और कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से मतभेदों को हल करने की प्रेरणा देनी चाहिए। इस दुखद घटना से सीखें कि एकजुटता और संयम से ही हम एक सुरक्षित और समृद्ध समाज बना सकते हैं।

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