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CJI बोले-क्या उत्तर भारतीयों का दक्षिणी भाषाएं सीखना अच्छा नहीं:सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से पॉलिसी पर जवाब मांगा; किताबों-टीचरों की कमी पर भी सवाल

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 20 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
CJI बोले-क्या उत्तर भारतीयों का दक्षिणी भाषाएं सीखना अच्छा नहीं:सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से पॉलिसी पर जवाब मांगा; किताबों-टीचरों की कमी पर भी सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े कई पहलुओं पर सवाल उठाए। कोर्ट ने किताबों और शिक्षकों की उपलब्धता, छात्रों पर पड़ने वाले बोझ और अलग-अलग स्कूलों में नीति लागू करने के तरीके पर जवाब मांगा। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह सुनवाई की।

बेंच CBSE की ओर से NEP 2020 के तहत कक्षा 9 के छात्रों के लिए लागू तीन-भाषा नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि नीति के तहत छात्रों को दो भारतीय ‘मूल’ भाषाएं पढ़नी होंगी, जबकि कई स्कूलों में इसके लिए जरूरी किताबें, शिक्षक और बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं।

कोर्ट को बताया गया कि शैक्षणिक सत्र शुरू होने के चार महीने बाद भी कुछ स्कूलों में तय भाषाओं की किताबें उपलब्ध नहीं हैं। इससे परीक्षा देने वाले लाखों छात्रों पर असर पड़ रहा है।

याचिकाकर्ताओं ने किताबों की कमी का मुद्दा उठाया CBSE और केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि अधिकारी जरूरी सामग्री के साथ मौजूद हैं। उन्होंने कोर्ट को किताबों की उपलब्धता से जुड़े स्क्रीनशॉट और दूसरी सामग्री दिखाने की पेशकश की।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर ने पूछा कि बिना बुनियादी पढ़ाई की सामग्री के छात्रों से अचानक नई भाषा सीखने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। ग्रोवर ने कहा, “मैं अचानक पंजाबी, तमिल या संयुक्त वाक्य कैसे सीखूंगा? हमें वर्णमाला से शुरुआत करनी होगी।

किताबें देखिए, वे संयुक्त वाक्यों से शुरू होती हैं।” हालांकि, कोर्ट ने कहा कि कोर्स अभी शुरू नहीं हुए हैं और अधिकारियों के पास इन्हें लागू करने की कोई योजना होगी। जस्टिस वी. मोहना ने कहा, “कोर्स अभी शुरू नहीं हुए हैं। मुझे भरोसा है कि उनके पास योजना होगी।

शिक्षक भी होंगे।” कक्षा 9 में फेल करने का सवाल नहीं ग्रोवर ने कहा कि अगर छात्रों से नई शुरू की गई भाषाओं में पास होने के अंक लाने को कहा गया, तो नीति से उन पर दबाव बढ़ेगा। एएसजी भाटी ने साफ किया कि योजना में केवल इंटरनल असेसमेंट होगा। अतिरिक्त भाषाओं में पास नहीं होने पर कक्षा 9 के छात्रों को रोका नहीं जाएगा।

भाटी ने कहा, “योजना में केवल इंटरनल असेसमेंट है। कक्षा 9 के छात्रों को फेल करके रोका नहीं जाएगा। वे क्वालिफाई नहीं करने पर भी कक्षा 10 में जाए

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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