भोपाल

कहीं छत नहीं, कहीं बिजली-पानी का संकट; CJP और APCR ने MP के स्कूलों का मुद्दा उठाया

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 25 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
कहीं छत नहीं, कहीं बिजली-पानी का संकट; CJP और APCR ने MP के स्कूलों का मुद्दा उठाया

‘स्कूल ठीक करो’ अभियान में कई जिलों के सरकारी स्कूलों का मौके पर आकलन, माया विश्वकर्मा ने उठाई स्कूलों के ऑडिट और मेहरागांव स्कूल के स्थायी समाधान की मांग

भोपाल, 25 सितंबर 2026। मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति को लेकर CJP की ओर से चलाए जा रहे ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। अभियान के दौरान दमोह, छतरपुर, रायसेन, नरसिंहपुर, ग्वालियर, भिंड, बालाघाट, सिवनी और भोपाल समेत कई जिलों के सरकारी स्कूलों का मौके पर जाकर आकलन करने का दावा किया गया। टीम ने स्कूल भवन, बिजली, पानी, शौचालय, बाउंड्रीवाल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के फोटो और वीडियो भी जुटाए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में APCR की ओर से सैयद जावेद अख्तर, एडवोकेट जुबैर इलाही, डॉ. फजल रहमान, एडवोकेट अशरफ अली और एडवोकेट नोमान अली शामिल हुए। APCR की टीम ने CJP की ओर से उठाई गई मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से इन मुद्दों को गंभीरता से लेने और समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक प्रयास करने की मांग की। CJP की ओर से सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।

CJP से जुड़ीं मेहरागांव ग्राम पंचायत की सरपंच माया विश्वकर्मा ने कहा कि कई सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए बिजली, पानी, शौचालय और सुरक्षित भवन जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि इसका असर गरीब, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के बच्चों पर अधिक पड़ रहा है। उनका कहना है कि सरकार को केवल नए स्कूल भवन बनाने पर ध्यान देने के बजाय मौजूदा स्कूलों की स्थिति का नियमित सोशल ऑडिट भी कराना चाहिए।

माया विश्वकर्मा के अनुसार उन्होंने ग्वालियर, भिंड, मुरैना, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, छतरपुर और रायसेन सहित कई जिलों के स्कूलों का निरीक्षण किया है। अभियान के दौरान कहीं स्कूल भवन जर्जर मिले तो कहीं बच्चों के खुले में पढ़ने की स्थिति सामने आई। रायसेन जिले के नरहरा गांव का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि स्कूल भवन करीब पांच साल पहले जर्जर घोषित कर बंद कर दिया गया था। उनके अनुसार नया भवन करीब दो साल पहले स्वीकृत हो चुका है, लेकिन निर्माण अब तक नहीं हुआ है।

माया विश्वकर्मा ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जिन स्कूलों में बिजली, पानी, शौचालय या भवन जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, उनकी वास्तविक स्थिति की जानकारी संबंधित अधिकारियों को स्वयं मौके पर जाकर जुटानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान केवल शिकायतें दर्ज कराने तक सीमित नहीं है। अभियान में पहले मौके पर समस्या देखी जाती है, फिर फोटो-वीडियो के माध्यम से उसका दस्तावेजीकरण किया जाता है और उसके बाद समाधान का सुझाव रखने का प्रयास किया जा रहा है।

अभियान के तहत ‘School Theek Karo’ नाम से डिजिटल प्लेटफॉर्म भी तैयार किए जाने की जानकारी दी गई। इसके माध्यम से नागरिक अपने क्षेत्र के स्कूलों में मौजूद समस्याओं की तस्वीरें, वीडियो और अन्य जानकारी साझा कर सकते हैं। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे स्कूलों की जमीनी समस्याओं का दस्तावेज तैयार करने और उन्हें संबंधित स्तर तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

मेहरागांव के स्कूल को लेकर भी माया विश्वकर्मा ने जनभागीदारी का प्रस्ताव रखा है। उनके अनुसार ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के सहयोग से पहली से 12वीं तक की पढ़ाई के लिए बेहतर भवन और जरूरी सुविधाओं वाला स्कूल विकसित करने की योजना का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा गया है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण स्कूल के लिए आर्थिक सहयोग देने को तैयार हैं और वह स्वयं भी अपने पुरस्कारों से प्राप्त राशि में से योगदान देने की बात कह चुकी हैं।

CJP ने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत दो प्रमुख मांगें सामने रखी हैं। पहली मांग मेहरागांव स्कूल के विद्यार्थियों के लिए तत्काल सुरक्षित शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने और स्कूल के स्थायी समाधान की है। दूसरी मांग मध्यप्रदेश के सभी प्राथमिक स्कूलों के बुनियादी ढांचे का व्यापक ऑडिट कराने की है, ताकि ऑडिट में सामने आने वाली कमियों को समयबद्ध तरीके से दूर किया जा सके।

अभियान की ओर से कहा गया कि उद्देश्य केवल स्कूलों की समस्याएं गिनाना नहीं, बल्कि उन्हें मौके पर देखकर प्रमाण जुटाना, दस्तावेज तैयार करना और समाधान के सुझाव सामने रखना है। इसी क्रम में अलग-अलग जिलों के स्कूलों की स्थिति का मौके पर आकलन और फोटो-वीडियो के माध्यम से दस्तावेजीकरण किया जा रहा है।

APCR की टीम ने CJP की इन मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से स्कूलों की जमीनी स्थिति और सामने लाई गई समस्याओं को गंभीरता से लेने तथा उनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में छत, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी की समस्या पर CJP और APCR ने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के अंतर्गत ध्यान आकर्षित किया। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शिक्षा के मूल आधार के रूप में स्कूलों की भौतिक स्थिति सीधे विद्यार्थियों के सीखने के माहौल को प्रभावित करती है। यदि इस मुद्दे पर तुरंत सुधार नहीं हुआ तो छात्रों की पढ़ाई में रुकावट, स्वास्थ्य जोखिम और शिक्षा के प्रति असंतोष बढ़ सकता है, जिससे सामाजिक-आर्थिक विकास पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।