CJP को प्रोटेस्ट के लिए जंतर-मंतर पर नहीं मिली परमिशन, क्या है दिल्ली पुलिस की दलील
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस काफी सख्त नजर आ रही है.
दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया है कि कल होने वाले धरना प्रदर्शन को लेकर परमिशन नहीं दी गई है.
ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस नूपुर प्रसाद ने बयान जारी कर बताया कि क्यों इस बार परमिशन नहीं दी गई है.
नूपुर प्रसाद ने बताया कि 7 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी के सह संयोजक सौरव दास की तरफ से एक आवेदन दिया गया था.
इसमें 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगी गई थी.
उन्होंने बताया कि जब इस आवेदन को लेकर जांच की गई तो ये पाया गया कि धरना प्रदर्शन के लिए ये आवेदन बहुत ही कम समय पहले दिया गया है.
ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस नूपुर प्रसाद का बयान
उन्होंने कहा कि वर्तमान नियमों के मुताबिक जंतर मंतर पर इस तरह के विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित तारीख से कम से कम 10 दिन पहले एप्लीकेशन देनी जरूरी है.
उन्होंने कहा कि ये भी गौर करने लायक है कि कॉकरोच जनता पार्टी का पहले आचरण ठीक नहीं रहा है.
उन्होंने उस समय भी पुलिस प्रशासन की तरफ से दिए गए नियमों को फॉलो नहीं किया था.
ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस नूपुर प्रसाद ने कहा कि सीजेपी ने पहले भी नियमों की अवहेलना की है.
निर्धारित प्रक्रिया का पूर्व में भी पालन ना किए जाने पर, कानूनी नियमों का न मानने और वर्तमान में ट्रैफिक नियमों और आमजन की सुरक्षा समेत तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जंतर मंतर पर प्रस्तावित धरना प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा रही है.
पुलिस करेगी सख्त कार्रवाई
उन्होंने कहा कि सूचित किया जाता है कि नई दिल्ली इलाके में बीएनएस की धारा-163 लागू है, जिसके तहत आवश्यक प्रतिबंध लगाए गए हैं.
उन्होंने आगे बताया कि कानून का उल्लंघन करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, किसी तरह की तोड़फोड़ करने पर पूर्व में कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी.
ये भी पढ़ें</
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के लिए परमिशन नहीं मिलने का मामला है। यह विषय दिल्ली पुलिस की सख्त नीतियों और राजनीतिक प्रदर्शन के नियंत्रण पर प्रकाश डालता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सार्वजनिक असंतोष के प्रबंधन में सरकार की पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों के संतुलन को दर्शाती है। यदि प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी जाती, तो नागरिकों को अपनी आवाज़ उठाने में कठिनाई हो सकती है, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। वहीं, सार्वजनिक व्यवस्था के लिए यह निर्णय व्यवस्था बन