CJP Protest Live: आशुतोष रांका-सौरव दास को 5 दिन की न्यायिक हिरासत, दीपके बोले- 'इमरजेंसी लगा दो'
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कॉकरोच जनता पार्टी के 3 नेता आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस के मुताबिक ये गिरफ्तारी ऐहतियातन की गई है.
तीनों को हिरासत में लेने के बाद जाफरपुर कलां पुलिस स्टेशन में रखा गया था. हिरासत के 17 घंटे बाद रात 3 बजे इन्हें संसद मार्ग पुलिस स्टेशन लाया गया था. रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी है.
वहीं अभिजीत दीपके आज दिल्ली आने वाले हैं.
CJP लीगल टीम की हेड रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि तीनों नेताओं को संसद मार्ग पुलिस स्टेशन लाया गया है और जल्द ही पेश किया जाएगा.
उन्होंने बताया कि तीनों पर बिना इजाजत प्रवेश, बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी काम में बाधा डालने जैसे आरोप हैं.
उन्हें सुबह SCM कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां से तिहाड़ जेल में ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा जा सकता है.
जंतर-मंतर पर किया था प्रदर्शन
आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्त शिंदे ने 13 अक्टूबर को बिना इजाजत के जंतर-मंतर पर बैरिकेड्स लांघकर प्रदर्शन किया था. सारे गेट्स बंद थे जिसके बाद तीनों ने गेट पर चढ़कर एंट्री की थी.
हिरासत में लिए जाने से पहले आशुतोष रांका ने एक वीडियो शेयर किया था.
जिसमें उन्होंने कहा था कि वो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेकर रहेंगे.
दिल्ली आएंगे दीपके
कॉकरोच जनता पार्टी के साथ प्रोटेस्ट करने के लिए अभिजीत दीपके दिल्ली आ रहे हैं.
उन्होंने इस बात की जानकारी खुद दी थी. 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए मुंबई से आ रहे दीपके को फ्लाइट में ही हिरासत में ले लिया गया था. इसके बाद उन्हें 50-50 हजार रुपए के जमानती मुचलके पर रिहा कर दिया गया था.
रिहाई के बाद वो अपने गांव के लिए रवाना हो गए थे. दीपके की दादी का निधन हो गया था. अब वो वापस आ रहे हैं.
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर कॉकरोच जनता पार्टी के तीन प्रमुख नेताओं के दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार होने और 5 दिन की न्यायिक हिरासत में लेने के इर्द-गिर्द है। यह घटना राजनीतिक विरोध और पुलिस के क़ानूनी कदमों के बीच के तनाव को दर्शाती है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि सरकार विपक्षी आवाज़ों को दबाने के लिए कितनी कड़ी कार्रवाई करने को तैयार है, जिससे लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों पर सवाल उठते हैं। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि नागरिकों को अपनी राजनीतिक अभिव्यक्ति में सतर्क रहना पड़े, और समाज में असंतो