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CRPF कोबरा यूनिट की पहली महिला IG बनीं संजुक्ता:2006 बैच की IPS अधिकारी हैं; जंगलों में AK-47 लेकर घूमीं, असम से उग्रवाद खत्म किया

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 18 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
CRPF कोबरा यूनिट की पहली महिला IG बनीं संजुक्ता:2006 बैच की IPS अधिकारी हैं; जंगलों में AK-47 लेकर घूमीं, असम से उग्रवाद खत्म किया

2006 बैच की IPS अधिकारी संजुक्ता पाराशर को CRPF की कोबरा (CoBRA) यूनिट का IG नियुक्त किया गया। CoBRA का पूरा नाम कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन है। वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। CRPF मुख्यालय ने पिछले हफ्ते उनकी नियुक्ति का आदेश जारी किया था। जानकारी आज सामने आई है।

वह 1996 बैच के IPS अधिकारी दानेश राणा की जगह लेंगी। संजुक्ता पाराशर असम-मेघालय कैडर की IPS अधिकारी हैं। असम में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान चलाने में उनकी अहम भूमिका रही थी। उन्हें असम की लेडी सिंघम भी कहा जाने लगा। साल 2008 में हुआ था CoBRA का गठन CRPF ने कई राज्यों में लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म (LWE) से निपटने के लिए 2008-09 में CoBRA बनाई थी।

इस यूनिट को पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में उग्रवाद से निपटने की जिम्मेदारी भी दी गई थी। CRPF ने हाल ही में मणिपुर में सशस्त्र हिंसा रोकने के लिए CoBRA की दो यूनिट तैनात की हैं। संजुक्ता पराशर की बहादुरी के 5 चर्चित किस्से जातीय हिंसा संभाली: साल 2008 में पहली पोस्टिंग के कुछ समय बाद उन्हें उडालगुड़ी भेजा गया, जहां बोडो और अन्य समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़की थी।

उन्होंने मौके पर पहुंचकर हालात नियंत्रित करने में भूमिका निभाई। AK-47 लेकर जंगलों में घूमीं: सोनितपुर में SP रहते हुए वह CRPF जवानों और पुलिस कमांडो के साथ घने जंगलों में उग्रवाद-रोधी अभियानों का नेतृत्व करती थीं। उनके हाथ में AK-47 होती थी। रातभर ऑपरेशन संभाला: अगस्त 2016 में असम-अरुणाचल सीमा के पास पुलिस, CRPF और असम राइफल्स के जॉइंट ऑपरेशन का नेतृत्व किया।

ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों पर गोलियां चलीं और ग्रेनेड फेंका गया। अभियान में NDFB(S) के तीन उग्रवादी मारे गए और हथियार बरामद हुए। एक साल में 16 उग्रवादी मारे: 2014–15 के दौरान संजुक्ता के नेतृत्व में चलाए गए ऑपरेशन में 16 उग्रवादी मारे गए और 64 की गिरफ्तारी हुई। हालांकि कभी आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं हुए।

जान से मारने की धमकियों के बावजूद ड्यूटी: मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उग्रवादी संगठनों की ओर से उन्हें कई बार धमकियां मिलीं। इसके बावजूद उन्होंने संवेदनशील इलाकों में अभियान और पुलिस नेतृत्व की जिम्मेदारियां जारी रखीं। ----------------------- ये खबर भी पढ़ें… ₹46 लाख का पैकेज छोड़ शारदेंदु बने आर्मी अफसर: दो अकादमी से सेना को मिले

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

संजुक्ता पाराशर की नियुक्ति से यह स्पष्ट होता है कि जब महिलाएँ साहस और समर्पण के साथ नेतृत्व करती हैं, तो समाज में बदलाव की संभावना बढ़ती है। यह प्रेरणा देती है कि हम सभी को अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखना चाहिए और किसी भी क्षेत्र में समान अवसरों के लिए संघर्ष करना चाहिए। साथ ही, संघर्षों का सामना करते समय शांतिपूर्ण और कानूनी मार्ग अपनाना ही दीर्घकालिक समाधान देता है।

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