अपराध

डाक विभाग में 8.48 करोड़ की हेराफेरी, सब-पोस्ट मास्टर को 18 महीने की सजा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 22 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
डाक विभाग में 8.48 करोड़ की हेराफेरी, सब-पोस्ट मास्टर को 18 महीने की सजा

डाक विभाग में करोड़ों रुपये की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बड़ी सफलता मिली है.

जालंधर के दखनी गेट, नकोदर के तत्कालीन सब-पोस्ट मास्टर संजीव कुमार को मोहाली की विशेष PMLA अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी ठहराते हुए एक साल छह महीने के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है.

अदालत ने 14 सितंबर 2026 को यह फैसला सुनाया.

जुर्माना नहीं देने पर दोषी को तीन महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा.

ED के मुताबिक मामला सीबीआई की ओर से 1 फरवरी 2018 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा था.

इसमें संजीव कुमार और अन्य पर पद का दुरुपयोग, धोखाधड़ी और सरकारी धन के गबन के आरोप लगाए गए थे.

54 फर्जी बचत खाते खोलकर 3.40 करोड़ की चपत

जांच में सामने आया कि संजीव कुमार ने कथित तौर पर 54 फर्जी बचत खाते खोले और इनके जरिये सरकारी खजाने को करीब 3.40 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया.

इसके अलावा 41 बचत खातों में प्रविष्टियों से छेड़छाड़ कर 2.79 करोड़ रुपये, जबकि 51 आरडी खातों में हेराफेरी कर 1.89 करोड़ रुपये की राशि का नुकसान पहुंचाया गया.

ED के अनुसार पीपीएफ, टर्म डिपॉजिट समेत अन्य खातों में भी हेराफेरी की गई.

इस तरह सरकारी धन की कुल करीब 8.48 करोड़ रुपये की राशि कथित तौर पर धोखाधड़ी से निकाली गई.

नकद और बैंक खातों के जरिये रकम का इस्तेमाल

ED ने बताया कि कथित तौर पर निकाली गई रकम को संजीव कुमार तथा उसके सहयोगियों के नियंत्रण वाले विभिन्न बैंक खातों के जरिये इधर-उधर किया गया.

जांच एजेंसी के मुताबिक अपराध से अर्जित रकम का इस्तेमाल आरोपी ने आलीशान जीवनशैली, जुए, निजी खर्च और अचल संपत्तियां खरीदने में किया.

42 लाख की संपत्ति पहले ही अटैच

मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दौरान ED ने करीब 42 लाख रुपये मूल्य की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की थीं.

यह कार्रवाई 2 मार्च 2025 के प्रोविजनल अ

📡 स्रोत: ABP Live

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

डाक विभाग में करोड़ों रुपये की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है, जिसमें जालंधर के दखनी गेट के पूर्व सब‑पोस्ट मास्टर संजीव कुमार को मोहाली की विशेष PMLA अदालत ने 18 महीने की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना सुनाया। यह विषय भ्रष्टाचार और वित्तीय अपराध से जुड़ा है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि उच्च पदस्थ अधिकारियों पर भी कानून का समान रूप से लागू होता है और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो रही है। आम जनता पर इसका असर यह है कि नागरिकों को भरोसा मिलता है कि सरकारी विभागों में भ

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

डाक विभाग की इस घोटाले से हमें यह सिखने को मिलता है कि सच्ची जिम्मेदारी और पारदर्शिता ही समाज के विश्वास को मजबूत करती है। जब कोई व्यक्ति अपनी शक्ति का दुरुपयोग करता है, तो कानून का रास्ता सबसे भरोसेमंद विकल्प है, न कि बदला या गुस्सा। इस घटना से प्रेरित होकर हम सभी को अपने कार्यों में ईमानदारी, जवाबदेही और नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि भ्रष्टाचार के किसी भी रूप को रोका जा सके।

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