दाल, सब्जी और तेल महंगा, एक हफ्ते में बेतहाशा बढ़े राशन के दाम
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महंगाई की दर लगातार तेजी से बढ़ रही है.
खासतौर से ईरान- यूएस के बीच शुरू हुए युद्ध के कारण सबसे पहले मंहगाई बढ़ना शुरू हुई थी. जिसके कारण अब तक भी लोगों के किचन का बजट बिगड़ा हुआ है.
खाने- पीने के सामानों में इतनी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है कि पिछले एक हफ्ते में ही काफी बजट हिल गया है.
पिछले कुछ दिनों में खाने का तेल, अरहर दाल और प्याज जैसी रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम तेजी से बढ़े हैं. इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है.
कुछ हरी सब्जियों के दाम भी बढ़े हैं.
सरकारी आंकड़ों में आया सामने
उपभोक्ता मंत्रालय ने हाल ही में कुछ आंकड़े जारी किए हैं, जिनके मुताबिक, अरहर दाल की खुदरा कीमत 124.23 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है.
एक साल पहले ये 113.66 रुपये प्रति किलो थी. इसका मतलब है कि इसकी कीमत में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
इसके अलावा चना, उड़द, मूंग और मसूर दाल के दाम भी पिछले साल के मुकाबले तेजी से बढ़े हैं.
प्याज ने रुलया, सब्जियों के बढ़े दाम
सब्जियों के दाम भी हाल फिलहाल में तेजी से बढ़ रहे हैं. जिसमें सबसे ज्यादा तो प्याज ने ही लोगों रुलाया है.
प्याज की कीमत में लगभग दो गुना बढ़ोतरी हुई है. फिलहाल प्याज की औसत खुदरा कीमत 54.23 रुपये प्रति किलो है. पिछले साल इन्हीं दिनों में प्याज की कीमत महज 25.97 रुपये प्रति किलो थी.
तो वहीं प्याज के साथ ही रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले टमामट की कीमत 39.16 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. जबकि पिछले साल इसका भाव 36.48 रुपये था.
आलू भी करीब 22 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. इसके अलावा हरी सब्जियां, अदरक लहसुन के दामों में भी तेजी देखने को मिली है.
खाने का तेल हुआ महंगा खाने का तेल भी अच्छा- खासा महंगा हुआ है. पिछले एक साल में सनफ्लावर ऑइल करीब 31 रुपये प्रति किलो महंगा हुआ है.
इसका भाव 161.40 रुपये से बढ़कर 192.56 रुपये प्रति किलो हो गया है.
मूंगफली तेल 186.93 रुपये से बढ़कर 208.44 रुपये और सरसों तेल 188.80 रुपये से बढ़कर 201.02 रुपये
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
भारत में दाल, सब्ज़ी और तेल के दाम पिछले सप्ताह में तेज़ी से बढ़े हैं, जिससे उपभोक्ताओं का रोज़मर्रा का बजट प्रभावित हो रहा है। यह विषय खाद्य महंगाई और उसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर प्रकाश डालता है। यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बढ़ती कीमतें परिवारों के खर्च को बढ़ाती हैं और खाद्य सुरक्षा पर खतरा पैदा करती हैं। आम जनता पर इसका असर यह है कि किराने का बिल बढ़ने से परिवारों को अपने खर्चों को समायोजित करना पड़ेगा, और कम आय वाले वर्गों पर इसका बोझ और भी भारी पड़ेगा।