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दारचा से त्रिलोकीनाथ जा रही ईको पदयात्रा के तीसरे दिन यात्रियों ने लाहौल की गहरी आध्यात्मिक विरासत को समझा

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
दारचा से त्रिलोकीनाथ जा रही ईको पदयात्रा के तीसरे दिन यात्रियों ने लाहौल की गहरी आध्यात्मिक विरासत को समझा

सितंबर 23, लाहौल-स्पीति (हिमाचल प्रदेश): लाहौल में इन दिनों ईको पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। 25 सितंबर तक चलने वाले इस पद यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। दारचा से त्रिलोकीनाथ जा रही ईको पदयात्रा के तीसरे दिन यात्रियों ने लाहौल की गहरी आध्यात्मिक विरासत को समझा। केलांग से रांगबे गांव की ओर बढ़ते हुए, बिलिंग में विश्राम के दौरान भूटान के धर्मगुरु डोखंपा खमट्रूल रिन्पोछे ने यात्रियों को संबोधित किया।

उन्होंने 12वीं-13वीं शताब्दी के महान तिब्बती बौद्ध योगी गो-त्सांग-पा की साधना स्थली और उनकी पावन परंपराओं के बारे में बताया। रिन्पोछे ने कहा कि भागा घाटी और गरशा क्षेत्र के कई पवित्र स्थल गो-त्सांग-पा की साधना से जुड़े हैं, जो लाहौल की सांस्कृतिक पहचान का अटूट हिस्सा हैं। यह पदयात्रा केवल पैदल चलने तक सीमित नहीं, बल्कि हिमालय की प्रकृति, संस्कृति और धरोहर को सहेजने का एक अनूठा प्रयास है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।