डेढ़ लाख कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, सुप्रीम कोर्ट से हिमाचल सरकार को झटका
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
अक्टूबर 31, नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अनुबंध कर्मचारियों के वित्तीय लाभ से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद प्रदेश के लाखों कर्मचारियों की नजरें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। दरअसल, यह पूरा विवाद अनुबंध पर नौकरी करने की अवधि को सेवा लाभ और वरिष्ठता में शामिल करने से जुड़ा है।
कर्मचारियों की मांग है कि नियमित होने से पहले जितने साल उन्होंने अनुबंध पर काम किया, उसका लाभ भी उन्हें दिया जाए। हिमाचल में वर्ष 2003 से सरकारी विभागों में अनुबंध आधार पर भर्तियां की जाती रही हैं। इन कर्मचारियों ने नियमितीकरण से पहले अलग-अलग समय अवधि यानी 8 साल 7 साल 3 साल अथवा 2 साल की अनुबंध सेवाएं दी है।
अब नियमितीकरण के बाद यह कर्मचारी अनुबंध अवधि से वित्तीय लाभ और वरिष्ठता देने की मांग कर रहे हैं। कई कर्मचारी इस मांग को लेकर अदालत पहुंचे और अलग-अलग मामलों में न्यायिक राहत प्राप्त की। इस मामले में 25 अप्रैल 2026 को हिमाचल हाईकोर्ट ने सरकार के 2024 के कानून को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था।
सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन 29 जुलाई को वहां से भी राहत नहीं मिली। इसके बाद दाखिल अब पुनर्विचार याचिका भी खारिज हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से जहां करीब डेढ़ लाख अनुबंधित कर्मचारियों को वित्तीय लाभ मिलने की उम्मीद है वहीं, इन कर्मचारियों को बकाया भुगतान करना राज्य सरकार के लिए बड़ी वित्तीय चुनौती बन सकता है। करोड़ों रुपये के भुगतान को लेकर अब सरकार की अगली कार्रवाई अहम होगी।