अपराध

डेढ़ साल के संघर्ष के बाद मनीषा परिवार को मिली राहत, अदालत के फैसले से न्याय की उम्मीद जगी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 4 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
डेढ़ साल के संघर्ष के बाद मनीषा परिवार को मिली राहत, अदालत के फैसले से न्याय की उम्मीद जगी

एंकर :- हरियाणा के बहुचर्चित मनीषा डेथ मिस्ट्री मामले में कोर्ट से परिवार को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने सीबीआई की ओर से पेश की गई क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए मामले की दोबारा जांच करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद मनीषा के परिवार और पिछले करीब डेढ़ साल से न्याय की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे लोगों में उम्मीद जगी है। मनीषा के पिता संजय ने इसे न्याय की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। वहीं किसान नेता सुरेश कोथ ने कहा कि 36 बिरादरी का भाईचारा शुरू से परिवार के साथ खड़ा है और जब तक बेटी को न्याय नहीं मिलेगा, संघर्ष जारी रहेगा।

मनीषा डेथ मिस्ट्री मामले में अदालत के फैसले के बाद मनीषा के पिता संजय ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें कोर्ट से उम्मीद की नई किरण मिली है। उन्होंने बताया कि पिछले करीब सवा साल से हरियाणा की 36 बिरादरी और विभिन्न खापों के प्रतिनिधि बेटी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

संजय के अनुसार जब तक मामला सामाजिक और सडक़ पर संघर्ष का था, तब तक पूरे भाईचारे ने उनका सहयोग किया। इसके बाद जब कानूनी लड़ाई शुरू हुई तो उनके वकील ने मजबूती से पक्ष रखा। इसी पैरवी के चलते अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया और दोबारा जांच के आदेश दिए। मनीषा के पिता ने सीबीआई की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया था।

उनका आरोप है कि जांच में संबंधित अधिकारियों और कॉलेज प्रशासन को शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा कई गवाहों के बयान और महत्वपूर्ण तथ्यों को भी सही तरीके से जांच का हिस्सा नहीं बनाया गया।

उन्होंने मनीषा की आखिरी कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन को लेकर भी सवाल उठाए। संजय का कहना है कि रात करीब 12 बजे हुई कॉल की लोकेशन और मोबाइल आखिरी बार कहां मिला तथा कहां बंद हुआ, इन सवालों का जवाब जांच में नहीं मिला। उन्होंने कॉलेज के सीसीटीवी फुटेज को लेकर भी संदेह जताया। उनका आरोप है कि हरियाणा प्रशासन ने सीसीटीवी फुटेज करीब 40 दिन तक अपने पास रखे और उन्हें समय पर आगे नहीं भेजा गया। फुटेज में कटिंग होने की बात भी उन्होंने कही। संजय ने बताया कि उनकी बेटी आइडियल कॉलेज, सिंघाना गई थी और परिवार शुरू से ही कॉलेज में हुई घटनाओं की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।

सुसाइड नोट को लेकर भी मनीषा के पिता ने सवाल उठाए। उनका कहना है कि जिस कथित सुसाइड नोट की बात की जा रही थी, उसकी लिखावट मनीषा की लिखावट से मेल नहीं खाती। संजय के मुताबिक अदालत ने लिखावट की जांच उत्तर भारत और दक्षिण भारत की दो अलग-अलग जगहों से करवाने के निर्देश दिए हैं। संजय ने यह भी कहा कि परिवार शुरू से ही मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है और जब तक बेटी को न्याय नहीं मिल जाता, उनकी लड़ाई जारी रहेगी।

वहीं किसान नेता सुरेश कोथ ने भी कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मनीषा मामले में शुरू से ही पूरे हरियाणा के लोगों के मन में कई सवाल थे, जिनका जवाब आज तक नहीं मिला। उन्होंने कहा कि परिवार को न्याय दिलाने के लिए 36 बिरादरी के लोगों ने एकजुट होकर संघर्ष किया है और आगे भी परिवार का पूरा साथ दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यदि किसी ने अपराध किया है तो उसे सामने लाया जाना चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसकी भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरत पडऩे पर परिवार और समाज दोबारा संघर्ष करने से पीछे नहीं हटेंगे। पिछले डेढ़ साल में पहली बार उन्हें लगा है कि उनकी बात किसी ने गंभीरता से सुनी है और न्याय की उम्मीद जगी है।

M
Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।