Demonetisation: नोटबंदी के 10 साल बाद भी कैश दोगुना, UPI 13600 गुना बढ़ा
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नोटबंदी के 10 साल बाद भारत में आनलाइन पेमेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. नगद रुपये की जरूरत खत्म नहीं हुई है. UPI ने रोजाना के पेमेंट का तरीका बदल दिया है.
इसके बाद भी नगद लेन-देन में ज्यादा अंतर नहीं आया है. नोटबंदी के एक दशक बाद भारत में आनलाइन पेमेंट तेजी से बढ़ा है. लोगों की नगद लेन-देन पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
UPI ने पैसे भेजने और रोजाना की खरीदारी को आसान बना दिया है. इसके बाद भी देश में नगद नगद लेन-देन की मांग अभी भी बनी हुई है.
दस साल में नगद लेन-देन में दोगूनी बढोत्तरी
नोटबंदी के समय एक बार में 86.9 प्रतिशत पैसे कागज के टूकड़े में बदल गए.
इससे देश में अचानक नोटों की कमी हो गई और लोगों व बिजनेसमैन को आनलाइन पेमेंट का सहारा लेना पड़ा. आनलाइन पेमेंट के तेजी से बढ़ने के बाद भी नोट की मांग भी लगातार बढ़ रही है.
इससे पता चलता है कि रोजाना नगद लेन-देन करने वालों और व्यापारीयों में भी नगद रुपये की कमी होती है.
दस साल में UPI लेनदेन करीब तेरह हजार गुना की बढोत्तरी
जहां नकदी की जरूरत बनी हुई है वहीं आनलाइन पेमेंट में भी बहुत तेजी से बढ़ोतरी हुई है. 2016 में शुरू हुआ UPI भारत में आनलाइन पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन गया है.
FY17 में UPI से लगभग 1.78 करोड़ लेनदेन हुए थे. FY26 में यह संख्या बढ़कर 241.62 अरब हो गई.
यानी लगभग दस साल में UPI लेनदेन में लगभग 13,600 गुना बढ़ोतरी हुई है.
अप्रैल 2016 में UPI की शुरुआत के समय सिर्फ 21 बैंक इससे जुड़े थे। सितंबर 2026 तक यह संख्या बढ़कर 756 हो गई. अब UPI का इस्तेमाल सिर्फ पैसे के लेन-देन के लिए नहीं हो रहा है.
दुकानों, बाजारों और छोटे कारोबारियों के यहां रोजाना की खरीदारी के लिए भी इसका इस्तेमाल हो रहा है.
UPI के साथ दूसरे आनलाइन पेमेंट का इस्तेमाल भी बढ़ा
आनलाइन पेमेंट का विस्तार केवल UPI तक सीमित नहीं है.
NEFT, IMPS, डेबिट और क्रेडिट कार्ड, प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स और आधार से भी
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar