राज्य

देश में पहली बार हुई झरनों की गिनती:10 राज्यों में 14,468 झरने; मणिपुर में सबसे ज्यादा, यहीं 1336 झरने खतरे में

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 30 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
देश में पहली बार हुई झरनों की गिनती:10 राज्यों में 14,468 झरने; मणिपुर में सबसे ज्यादा, यहीं 1336 झरने खतरे में

देश की पहली स्प्रिंग सेंसस के दूसरे हिस्से में 10 राज्यों के 14,468 झरनों की गिनती हुई है। इनमें सबसे ज्यादा झरने मणिपुर और महाराष्ट्र में मिले हैं। जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, देश की करीब 15% आबादी यानी लगभग 20 करोड़ लोग सीधे या परोक्ष रूप से झरने के पानी पर निर्भर हैं।

यह रिपोर्ट 25 सितंबर को भारत मंडपम में हुए 9वें इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक 2026 के समापन समारोह में जारी की गई। इसमें आंध्र प्रदेश, असम, गोवा, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। सेंसस का मकसद झरनों का भरोसेमंद, एक जैसे मानकों वाला और जियो-रेफरेंस्ड डेटा तैयार करना था।

इससे योजनाएं बनाने, झरना-क्षेत्र प्रबंधन और नीतियां तैयार करने में मदद मिलेगी। रिपोर्ट का नाम ‘फर्स्ट सेंसस ऑफ स्प्रिंग्स (वॉल्यूम II, पार्ट-II)’ है। इसमें संकटग्रस्त और बेहद जरूरी झरनों की पहचान के लिए व्यवस्थित मैपिंग की जरूरत बताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बुनियादी ढांचा तैयार करते समय इन झरनों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

साथ ही, झरना-क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रमों के लिए विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए। पहले वॉल्यूम II की रिपोर्ट बिहार, कर्नाटक, केरल, लद्दाख, सिक्किम और तमिलनाडु के लिए जारी की गई थी। यह रिपोर्ट इंडिया वाटर डे 2026 पर प्रकाशित हुई थी। महाराष्ट्र में 3,652 झरने, इनमें 909 मौसमी महाराष्ट्र में 2,629 झरने पूरे साल बहने वाले, 909 मौसमी और 114 सूखे हैं।

इनमें 3,612 झरने ग्रामीण और 40 शहरी इलाकों में हैं। इनमें करीब 86.5% झरने सरकारी या सार्वजनिक स्वामित्व में हैं। 13.5% झरने निजी स्वामित्व में हैं। संसाधनों पर खतरे के लिए 3,508 झरनों का आकलन किया गया। इनमें 265 झरने यानी 7.6% खतरे में पाए गए। मणिपुर में 34.5% झरनों पर खतरा मणिपुर में 3,419 झरने पूरे साल बहने वाले, 457 मौसमी और 65 सूखे हैं।

राज्य में 91.4% झरने सार्वजनिक स्वामित्व में हैं। संसाधनों पर खतरे के लिए जिन झरनों का आकलन हुआ, उनमें 1,336 यानी 34.5% खतरे में पाए गए। राज्य में स्थानीय लोग 3,127 झरनों का इस्तेमाल करते हैं। बाहरी लोग 634 झरनों और जंगली जानवर 113 झरनों का इस्तेमाल करते हैं। ओडिशा में 1957 झरने, दार्जिलिंग में 1200 झरने ओडिशा में 1,568 झरने पूरे साल बहने वाले, 315 मौसमी और

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

📰 पूरी खबर पढ़ें (Dainik Bhaskar पर जाएं)

💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर भारत में झरनों के पहले पूर्ण सर्वेक्षण के परिणाम पर आधारित है, जिसमें 10 राज्यों में कुल 14,468 झरनों की गिनती हुई है। मणिपुर और महाराष्ट्र में सबसे अधिक झरने पाए गए, जबकि मणिपुर के 1,336 झरने खतरे में हैं। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि झरने जल संरक्षण, कृषि और घरेलू उपयोग के लिए प्रमुख स्रोत हैं, और उनकी कमी से लाखों लोगों पर असर पड़ेगा। रिपोर्ट बताती है कि लगभग 15% आबादी, यानी 20 करोड़ लोग, झरने के पानी पर निर्भर हैं। इसलिए इस डेटा से जल नीतियों, संरक्षण कार्यक्रमों और क्षेत्रीय जल प्रब

J
JKS News Desk

वॉयस ऑफ क्रांति की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।