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देश में पहली बार कानपुर कार्डियोलॉजी में TAVI की वर्कशॉप:अमेरिका-वेनेजुएला के डॉक्टरों की देखरेख में बिना ओपन-हार्ट सर्जरी 4 मरीजों के वाल्व बदले

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 4 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
देश में पहली बार कानपुर कार्डियोलॉजी में TAVI की वर्कशॉप:अमेरिका-वेनेजुएला के डॉक्टरों की देखरेख में बिना ओपन-हार्ट सर्जरी 4 मरीजों के वाल्व बदले

हृदय रोग संस्थान (कार्डियोलॉजी) ने दिल के मरीजों के इलाज में एक और नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

संस्थान में भारत की पहली विशेष TAVI (ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन) वर्कशॉप आयोजित की गई, जिसमें 'ऑनक्रिया ड्राई बायोलॉजिकल वाल्व' (Oncrea Dry Biological Valve) तकनीक का इस्तेमाल कर 4 गंभीर मरीजों में नया वाल्व सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया।

इसमें अमेरिका और वेनेजुएला के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ कार्डियोलॉजी की टीम ने मिलकर ऑपरेशन किए। बिना ओपन-हार्ट सर्जरी के बदला गया वाल्व गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस से जूझ रहे मरीजों के लिए यह तकनीक किसी वरदान से कम नहीं है। कार्डियोलॉजी के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. एस.के.

सिन्हा ने बताया कि इस प्रक्रिया में बिना किसी बड़ी चीर-फाड़ या ओपन-हार्ट सर्जरी के कैथेटर (तार/नली) के जरिए नया वाल्व बिठाया जाता है। इससे मरीज को कम दर्द होता है, अस्पताल में ज्यादा दिन रुकना नहीं पड़ता और रिकवरी बहुत तेजी से होती है।

अंतरराष्ट्रीय डॉक्टरों की टीम ने साझा की तकनीक इस ऐतिहासिक वर्कशॉप में वेनेजुएला के प्रख्यात विशेषज्ञ डॉ. कार्लोस, अमेरिका से डॉ. क्रिस और डॉ. तारा की टीम कानपुर पहुंची।

भारतीय टीम की ओर से निदेशक डॉ. राकेश वर्मा व डॉ. यू. पांडेय के मार्गदर्शन में डॉ. एस.के. सिन्हा, डॉ. एमएम रजी, डॉ. मुकेश, डॉ. एके शर्मा, डॉ. मोहित, डॉ. हिमांशु और डॉ. पी. शुक्ला शामिल रहे। सभी मरीजों का सीटी स्कैन आधारित विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद वाल्व की सटीक पोजीशनिंग की गई।

युवा मरीजों के लिए क्यों खास है नया ड्राई वाल्व? डॉक्टरों के अनुसार, पहले TAVI तकनीक का इस्तेमाल केवल अधिक उम्र या हाई-रिस्क मरीजों के लिए किया जाता था। लेकिन अब कम उम्र के मरीजों में भी इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। 'केवल तत्काल सफलता नहीं, मरीज की पूरी लाइफ-जर्नी पर ध्यान' संस्थान के निदेशक डॉ.

राकेश वर्मा और वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. एस.के. सिन्हा ने कहा कि यह सिर्फ 4 मरीजों के सफल ऑपरेशन की बात नहीं है, बल्कि भारत में नई पीढ़ी की वाल्व तकनीक की शुरुआत है। हमारा मकसद सिर्फ आज का ऑपरेशन सफल बनाना नहीं, बल्कि मरीज को ऐसा वाल्व देना है जो उसकी पूरी जीवन-यात्रा में safe और टिकाऊ बना रहे।

📡 स्रोत: NewsData.io

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