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देवधरा राजगढ़: आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम है नरसिंहगढ़ का पातालेश्वर महादेव मंदिर

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
देवधरा राजगढ़: आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम है नरसिंहगढ़ का पातालेश्वर महादेव मंदिर

राजगढ़। मालवा का मिनी कश्मीर कहे जाने वाले नरसिंहगढ़ की पहचान सिर्फ इसकी पहाड़ियों, हरियाली, झरनों और ऐतिहासिक विरासत से नहीं है, बल्कि यहां मौजूद प्राचीन धार्मिक स्थल भी इसकी सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध करते हैं। इन्हीं प्रमुख स्थलों में शामिल है पातालेश्वर महादेव मंदिर, जिसे स्थानीय स्तर पर छोटे महादेव के नाम से भी जाना जाता है।

घने जंगल, पहाड़ी परिवेश और प्राकृतिक जलस्रोतों के बीच स्थित यह मंदिर भगवान शिव के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। जिला प्रशासन की पर्यटन वेबसाइट पर भी पातालेश्वर महादेव मंदिर को नरसिंहगढ़ के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में शामिल किया गया है।

स्वयंभू शिवलिंग से जुड़ी मान्यता

पातालेश्वर महादेव मंदिर विंध्याचल की पहाड़ियों के बीच स्थित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां विराजमान शिवलिंग स्वयंभू है और इसकी स्थापना किसी व्यक्ति ने नहीं की। इसी मान्यता के कारण इन्हें पातालेश्वर महादेव कहा जाता है। मंदिर के पुजारी शिव शंकर शर्मा के अनुसार उनका परिवार पीढ़ियों से यहां पूजा-अर्चना करता आ रहा है।

स्थानीय परंपरा में यह भी बताया जाता है कि नरसिंहगढ़ रियासत के राजा ने जंगल में वट वृक्ष के नीचे शिवलिंग के दर्शन किए थे। इसके बाद उन्होंने यहां पूजा-अर्चना कर मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। पुजारी के अनुसार बाद में बड़े आकार के शिवलिंग की स्थापना का प्रयास किया गया। इसी दौरान आंधी-तूफान और बारिश के कारण लाई गई नंदी की मूर्ति क्षतिग्रस्त हो गई।

स्थानीय मान्यता है कि इसके बाद राजा ने पुराने शिवलिंग को ही यथास्थान रखने का निर्णय लिया।

सावन में लगता है मेला

पातालेश्वर महादेव मंदिर में सावन के महीने में विशेष आयोजन होते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं के अनुसार संतान प्राप्ति की कामना लेकर भी श्रद्धालु यहां आते हैं और मनोकामना पूरी होने पर दोबारा आकर धार्मिक परंपरा निभाते हैं।

मंदिर परिसर में मौजूद कुंड भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार कुंड के जल में स्नान करने से बीमारियां दूर होती हैं। हालांकि, यह एक धार्मिक मान्यता है, जिसका चिकित्सकीय प्रमाण अलग विषय है। महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में रात्रि भजन संध्या का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें बाहर से आने वाले कलाकार भजनों की प्रस्तुति देते हैं।

रियासत काल से जुड़ी परंपराएं

मंदिर का संबंध नरसिंहगढ़ रियासत के दौर से भी बताया जाता है। स्थानीय जानकारी के अनुसार सावन के दौरान यहां साधु-संतों के ठहरने की व्यवस्था की जाती थी। साधु-संतों की जमात कई महीनों तक यहां रहकर पूजा-अर्चना करती थी। मंदिर परिसर में एक प्राचीन राम-जानकी मंदिर भी है। इसके अलावा पूर्वमुखी गणेश जी और दक्षिणमुखी हनुमान जी की प्रतिमाएं भी मौजूद हैं। मंदिर परिसर में जलस्रोत के रूप में कुंड है।

जंगल और पहाड़ियों के बीच धार्मिक पर्यटन

पातालेश्वर महादेव की खासियत इसकी धार्मिक पहचान के साथ-साथ इसका प्राकृतिक परिवेश भी है। मंदिर के आसपास पहाड़ियां, हरियाली और जलस्रोत मौजूद हैं। बारिश और सावन के दौरान क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और भी निखर जाती है। मंदिर के समीप चिड़ीखो वन्यजीव अभयारण्य और घना जंगल होने के कारण यहां प्राकृतिक जैव विविधता भी देखने को मिलती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार वन्यजीव कई बार पानी की तलाश में मंदिर के कुंड तक पहुंचते रहे हैं। नरसिंहगढ़ की ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत में पातालेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र होने के साथ पर्यटन की पहचान भी बन चुका है। प्राचीन परंपराओं, स्थानीय मान्यताओं और प्राकृतिक परिवेश का यह संगम नरसिंहगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को खास बनाता है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।