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Devesh Belbase की अगुवाई में बनी Expert Committee, Tibet-Nepal Flood की करेगी जांच

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 24 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Devesh Belbase की अगुवाई में बनी Expert Committee, Tibet-Nepal Flood की करेगी जांच

नेपाल ने तिब्बत-नेपाल में आई बाढ़ के स्रोत, कारण और घटनाओं के क्रम का पता लगाने के लिए सात सदस्यों वाली एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई है, जिसे अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए दो महीने का समय दिया गया है। नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्रालय ने बुधवार को इस मामले की जांच के लिए जल नीति और गवर्नेंस के एक्सपर्ट देवेश बेलबेस की देखरेख में यह कमेटी बनाई।

कमेटी में हाइड्रोलॉजिस्ट नरेंद्र मान शाक्य, ग्लेशियोलॉजिस्ट रिजन भक्त कायस्थ, रिमोट-सेंसिंग एक्सपर्ट उत्तम बाबू श्रेष्ठ, जियोलॉजिस्ट मेघराज धिताल, हाइड्रोपावर इंफ्रास्ट्रक्चर एक्सपर्ट हरि पंडित और आपदा-जोखिम कम करने वाले एक्सपर्ट अनिल पोखरेल शामिल हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता मोहन कुमार शाक्य ने ANI को बताया, "कमेटी बाढ़ के संभावित स्रोत से लेकर भोटेकोशी/ल्हेन्डे नदी प्रणाली और निचले इलाकों तक फील्ड स्टडी करेगी।

इस जांच में न सिर्फ़ बाढ़ के वैज्ञानिक कारणों और घटनाओं के क्रम को देखा जाएगा, बल्कि यह भी पता लगाया जाएगा कि भविष्य में इसी तरह की आपदाओं से पनबिजली और ऊर्जा से जुड़े दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर को कैसे बचाया जा सकता है। अधिकारी के मुताबिक, स्टडी के दौरान ज़रूरत पड़ने पर ड्रोन, सैटेलाइट इमेज और दूसरी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा।

शाक्य ने कहा, "कमेटी इस घटना को सिर्फ़ बहुत ज़्यादा बारिश या बाढ़ के मामले के तौर पर नहीं, बल्कि एक 'कैस्केडिंग डिज़ास्टर' (एक के बाद एक होने वाली आपदाओं की कड़ी) के तौर पर देखेगी, जिसमें हिमालयी, भू-वैज्ञानिक और जल-विज्ञान से जुड़े खतरे एक के बाद एक सक्रिय हुए हो सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Nepal के विदेश मंत्री शिशिर खनाल से मिले राजदूत Naveen Srivastava, द्विपक्षीय सहयोग पर जताया आभार हिमालयी देश में आपदा आने के कुछ दिनों बाद, सेंटर फॉर हाइड्रोलॉजी एंड वॉटर रिसोर्सेज रिसर्च की एक शुरुआती स्टडी में कहा गया कि यह पता लगाने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक सबूत नहीं हैं कि बाढ़ कहाँ से शुरू हुई, किन भौतिक प्रक्रियाओं ने इसे शुरू किया, और वे प्रक्रियाएँ भोटेकोशी-ल्हेन्डे नदी प्रणाली के ज़रिए निचले इलाकों में कैसे फैलीं।

सेंटर ने सुझाव दिया कि आपदा को निश्चित रूप से जलवायु परिवर्तन से जोड़ने से पहले पूरी घटनाक्रम की व्यापक वैज्ञानिक जाँच की जानी चाहिए। ऊर्जा बुनियादी ढाँचे को हुए नुकसान से सबक लेते हुए, समिति जोखिम की तैयारी के उपायों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी बिजली उत्पादन और सिस्टम के संचालन को बनाए रखने के तरीकों की सिफारिश करेगी।

इसे भी पढ़ें: Nepal के नक्शे में शामिल Lipulekh और Kalapani पर बोले विदेश मंत्री, यह कोई बोझ नहीं अधिकारियों के अनुसार, मंत्रालय ने तीन चरणों में यह अध्ययन करने की योजना बनाई है। समिति सबसे पहले ऊँचे हिमालयी क्षेत्र से लेकर भोटेकोशी/ल्हेन्डे नदी प्रणाली और निचले इलाकों तक की घटनाओं के क्रम और भौतिक नुकसान की जाँच करेगी।

इसके साथ ही, समिति ग्लेशियर, चट्टान और मिट्टी-ढलान की अस्थिरता, भूस्खलन, मलबे, नदी के बहाव और बाढ़ के बीच आपसी संबंधों की भी जाँच करेगी। दूसरे चरण में, समिति बाढ़ के तत्काल और मूल भौतिक कारणों की पहचान करेगी। संभावित स्रोत वाले इलाकों में, विशेषज्ञों की टीम चट्टानों की स्थिति, दरारों, कमज़ोर भूवैज्ञानिक संरचनाओं, ढलान की स्थिरता, भूस्खलन की संभावना और नदी में आए तलछट की मात्रा और विशेषताओं का अध्ययन करेगी।

📡 स्रोत: NewsData.io

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