DFO ऑफिस से टेंडर के 3.37 लाख लेकर LDC गायब:रसीद बनाने के बाद सरकारी खाते में राशि जमा नहीं कराई
फतेहपुर में वन विभाग के DFO कार्यालय में टेंडर की धरोहर राशि (EMD) राशि के 3.37 लाख रुपए लेने के बाद कनिष्ठ लिपिक के लापता होने से वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है।
आरोप है कि लिपिक ने 18 अगस्त को शारदा इंटरप्राइजेज से पूरी रकम नकद ली और विभाग की GA-55 रसीद भी जारी कर दी, लेकिन 7 दिन बाद 25 अगस्त तक राशि सरकारी खाते में जमा नहीं हुई। शिकायत के बाद रिकॉर्ड की जांच शुरू हुई तो संबंधित कर्मचारी ने कार्यालय आना बंद कर दिया। DFO ने मामले की जांच ACF को सौंपी है।
जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर विभागीय कार्रवाई के साथ FIR दर्ज कराने की तैयारी है। पढ़िए ...
क्या है पूरा मामला 18 अगस्त को लिए 3.37 लाख रुपए, 25 अगस्त तक सरकारी खाते में जमा नहीं जानकारी के अनुसार, फतेहपुर की शारदा इंटरप्राइजेज ने वन विभाग के विकास कार्यों से जुड़े एक टेंडर के लिए 3 लाख 37 हजार रुपए धरोहर राशि (EMD) के तौर पर जमा कराए थे।
आरोप है कि वन विभाग की स्टोर शाखा में काम करने वाले कनिष्ठ लिपिक प्रहलाद ने पूरी रकम नकद ले ली और इसकी GA-55 रसीद भी दे दी। लेकिन 18 अगस्त को ली गई यह रकम 25 अगस्त तक सरकारी बैंक खाते में जमा नहीं हुई।
नियमों के मुताबिक सरकारी कार्यालय में मिलने वाली रकम को तय प्रक्रिया के तहत खाते में जमा करना और उसका हिसाब दर्ज करना जरूरी होता है।
शिकायत के बाद कर्मचारी कार्यालय नहीं आया सूत्रों के अनुसार करीब दो दिन पहले जब फर्म की ओर से शिकायत विभाग तक पहुंची और रिकॉर्ड की जांच शुरू हुई, उसके बाद से संबंधित कनिष्ठ लिपिक कार्यालय नहीं आ रहा है। इससे मामले को लेकर संदेह और बढ़ गया है। DFO ने ACF को सौंपी जांच DFO काविया बी.
ने मामले की जांच ACF प्राची चौधरी को सौंपी है। DFO ने बताया कि संबंधित ठेकेदार की ओर से नकद रकम जमा कराने की शिकायत मिली है। शुरुआती जांच में यह भी पता चला है कि GA-55 रसीद कार्यालय से ही जारी की गई थी। अब पूरे रिकॉर्ड की जांच और मिलान कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जांच में अगर वित्तीय गड़बड़ी या सरकारी पैसे के गलत इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मचारी को राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम-16 (CCA) के तहत नोटिस दिया जाएगा। साथ ही उसके खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज कराई जाएगी।
चार रिकॉर्ड की होगी जांच विभाग इस मामले में चार प्रमुख रिकॉर्ड की जांच कर रहा है। इनमें GA-55 रसीद सही तरीके से जारी हुई या नहीं और उसमें क्या जानकारी दर्ज है, कैश बुक में रकम की एंट्री हुई या नहीं, सरकारी बैंक खाते में रकम जमा हुई या नहीं और संबंधित टेंडर की EMD से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।
इन सभी रिकॉर्ड को मिलाने के बाद ही साफ होगा कि 3.37 लाख रुपए कार्यालय में ही रखे रहे या रकम को लेकर कोई वित्तीय गड़बड़ी हुई। 500 रुपए से ज्यादा नकद लेने पर सामान्य तौर पर रोक राजस्थान सरकार के GFAR के Rule-42 के मुताबिक सामान्य स्थिति में एक मामले में 500 रुपए से ज्यादा नकद नहीं लिया जा सकता।
इसके लिए सक्षम अधिकारी से विशेष अनुमति जरूरी होती है। बड़ी रकम आमतौर पर चेक, बैंक ड्राफ्ट, बैंकर्स चेक या ऑनलाइन माध्यम से जमा कराई जाती है।
सरकारी कार्यालय में मिलने वाली हर रकम का कैश बुक में हिसाब दर्ज करना और उसे समय पर सरकारी खाते में जमा करना जरूरी है, ताकि सरकारी पैसे का पूरा रिकॉर्ड बना रहे और व्यवस्था में पारदर्शिता रहे। फर्म ने की शिकायत, गड़बड़ी मिली तो होगी FIR DFO काविया बी. ने कहा कि संबंधित फर्म की ओर से शिकायत मिली है।
कार्यालय से रसीद जारी होने की पुष्टि हुई है। मामले की जांच ACF को सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी और पुलिस में भी मामला दर्ज कराया जाएगा।
📡 स्रोत: NewsData.io