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धान, सब्जी, बीज व बांस से 29500 राखियां तैयार, लगाएंगे स्टॉल

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 25 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
धान, सब्जी, बीज व बांस से 29500 राखियां तैयार, लगाएंगे स्टॉल

रक्षाबंधन पर्व 28 अगस्त को है। पर्व को ध्यान मंे रखते हुए जिले की बिहान महिला स्व-सहायता समूहों की महिलाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए धान, सब्जी, बीज और बांस जैसी स्थानीय सामग्री से बनाई जा रही इन राखियों की डिमांड लोग कर रहे है।

जिला पंचायत के अनुसार जिले के 11 स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने अब तक 29,500 राखियां तैयार की हैं। जिला पंचायत के सीईओ सुनील कुमार चंद्रवंशी ने बताया कि घर में ही राखियां तैयार कर महिलाएं रोजगार पा रही है। आत्मनिर्भर हो रही है। राखियों को आकर्षक पैकिंग के साथ ब्रांड नाम देकर बाजार में उतारा जा रहा है।

इन्हें स्थानीय हाट-बाजारों और शासकीय कार्यालयों में स्टॉल के माध्यम से किफायती दर पर बेचने की तैयारी है। राखियों की कीमत बाजार में उपलब्ध फैंसी राखियों की तुलना में कम रखी गई है। इनकी कीमत 10 से अधिकतम 35 रुपए तक है।

कुम्हुडकट्टा, सिरसिदा, नेवारीकला और अर्पण महिला संकुल स्तरीय संगठन सनौद से जुड़ी महिलाएं आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री से बनने से इन राखियों की डिमांड है।

दूसरे जिलों से भी राखियों के ऑर्डर अब मिल रहे हैं जय मां पहाड़ी स्व-सहायता समूह की कुसुम सिन्हा ने बताया कि बिहान से प्रशिक्षण मिलने के बाद समूह की महिलाएं चार साल से राखी निर्माण का काम कर रही हैं। बाजार में मांग के साथ दूसरे जिलों से भी राखियों के ऑर्डर मिल रहे हैं।

जिपं के अनुसार पिछले साल समूहों ने करीब 15 हजार राखियां बनाकर 3 लाख रुपए आमदनी प्राप्त किया था। इस साल अब तक 7 हजार राखियां बिक चुकी है। जिससे 1.75 लाख रुपए की आय हो चुकी है। राखी का उपयोग होने के बाद बीज को कहीं भी मिट्‌टी में डालेंगे तो अंकुरित होगा।

जिला पंचायत की ओर से विशेष प्रशिक्षण दिया गया महिलाएं पर्यावरण संरक्षण को ध्यान मंे रखकर धान, बांस, लौकी, करेला, रखिया, खीरा सहित कई सब्जी के बीज का उपयोग कर आकर्षक राखियां तैयार कर रही है। यह राखियां जिले के लोगों को आसानी से कम दाम में मिल सकें।

इसके लिए कलेक्ट्रेट सहित सरकारी विभाग के कार्यालयों के सामने स्टॉल लगाया जाएगा। इन महिलाओं को जिला प्रशासन, जिला पंचायत की ओर से विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। महिलाओं से तैयार राखियों की डिमांड बालोद जिले के अलावा राजनांदगांव, डोंगरगढ़, मोहला, रायपुर में भी है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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