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ध्रांगध्रा का 132 साल पुराना महालक्ष्मी मंदिर: जहाँ आज भी गूंजते हैं वल्लभ भट्ट और दया कल्याण के प्राचीन गरबे

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 13 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
ध्रांगध्रा का 132 साल पुराना महालक्ष्मी मंदिर: जहाँ आज भी गूंजते हैं वल्लभ भट्ट और दया कल्याण के प्राचीन गरबे

DATE- 13 oCT 2026, सुरेंद्रनगर

सुरेंद्रनगर जिले के ध्रांगध्रा में स्थित 132 साल पुराने महालक्ष्मी माताजी के मंदिर में नवरात्रि के दौरान भक्ति का एक अनोखा माहौल देखने को मिल रहा है। यहाँ वरिष्ठ नागरिक (Senior Citizens) बैठकर वल्लभ भट्ट और दया कल्याण के प्राचीन गरबा, आरती और थाल का गायन करते हैं। माताजी का रोजाना अलग-अलग श्रृंगार किया जाता है। आधुनिक डिस्को डांडिया के इस दौर में भी ये पारंपरिक गरबे युवाओं और बच्चों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।

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बाइट : भरतभाई दवे (मंदिर के पुजारी)

मनुश्रीबा जाला (दर्शन के लिए आने वाली और गरबा में हिस्सा लेने वाली युवती)

कमल भट्ट (गरबा गवाने वाले)

विजयभाई जानी (गरबा गवाने वाले वरिष्ठ नागरिक)

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।