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डिजिटल तकनीक से स्वास्थ्य सेवाओं की तेज, पारदर्शी और विश्वसनीय डिलीवरी सुनिश्चित करें : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 3 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
डिजिटल तकनीक से स्वास्थ्य सेवाओं की तेज, पारदर्शी और विश्वसनीय डिलीवरी सुनिश्चित करें : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

ई-एचएमआईएस की प्रगति और क्रियान्वयन की समीक्षा, मरीजों की डिजिटल केस हिस्ट्री और दवाओं की रियल टाइम निगरानी के निर्देश

भोपाल, 3 सितंबर 2026। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में ई-एचएमआईएस (e-HMIS) की प्रगति और क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की।

उन्होंने निर्देश दिए कि ई-एचएमआईएस को स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी प्रबंधन के सशक्त डिजिटल माध्यम के रूप में विकसित किया जाए, ताकि मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकें और विभागीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो।

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बैठक में आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा धनराजू एस. ने ई-एचएमआईएस के वर्तमान क्रियान्वयन, विभिन्न मॉड्यूल की प्रगति, डिजिटल सेवाओं के एकीकरण और आगामी कार्ययोजना का प्रस्तुतिकरण दिया। बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सुखवीर सिंह सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ई-एचएमआईएस में प्रत्येक मरीज का समुचित डिजिटल डेटाबेस और केस हिस्ट्री उपलब्ध हो।

पूर्व उपचार, जांच, दवाओं और अन्य आवश्यक चिकित्सकीय जानकारी का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से चिकित्सकों को उपचार संबंधी निर्णय लेने में सुविधा होगी और मरीज को बार-बार अपनी पिछली चिकित्सा जानकारी उपलब्ध कराने की आवश्यकता नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड ऐसी व्यवस्था के अनुरूप विकसित किए जाएं, जिससे उपचार की निरंतरता बनी रहे और अधिकृत चिकित्सकों तथा स्वास्थ्य संस्थाओं को आवश्यकता के अनुसार संबंधित जानकारी समय पर उपलब्ध हो सके।

शुक्ल ने स्वास्थ्य संस्थाओं में उपलब्ध लैब सेवाओं और जांच प्रक्रियाओं को ई-एचएमआईएस से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जांच के बाद रिपोर्ट तैयार होने की प्रक्रिया डिजिटल प्रणाली से जुड़ी हो, ताकि रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध हो और चिकित्सक उपचार के दौरान उसे तत्काल देख सकें।

उन्होंने जांच रिपोर्ट की समयबद्धता, शुद्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं में दवाओं की उपलब्धता की निगरानी के लिए ई-एचएमआईएस को दवा वितरण एवं स्टॉक प्रबंधन प्रणाली से प्रभावी रूप से जोड़ने को कहा।

आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, वितरण, खपत और स्टॉक की स्थिति की रियल टाइम निगरानी की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी स्वास्थ्य संस्था में आवश्यक दवाओं की कमी की स्थिति उत्पन्न न हो। इसके लिए डिजिटल डैशबोर्ड और अलर्ट आधारित व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-एचएमआईएस का उद्देश्य केवल डेटा संकलन तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसका उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं की योजना, निगरानी, विश्लेषण और बेहतर प्रबंधन के लिए किया जाए।

डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वास्थ्य संस्थाओं की कार्यप्रणाली, मरीजों को उपलब्ध सेवाओं, जांच और दवा वितरण सहित महत्वपूर्ण गतिविधियों की रियल टाइम स्थिति की जानकारी अधिकारियों को मिलनी चाहिए।

उन्होंने डैशबोर्ड आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था को मजबूत करने और उपलब्ध डेटा के आधार पर कमजोर क्षेत्रों की पहचान कर सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि ई-एचएमआईएस के विभिन्न मॉड्यूल के बीच बेहतर इंटरकनेक्टिविटी से मरीज के पंजीयन, उपचार, जांच, रिपोर्ट, दवा और अन्य सेवाओं का डेटा एकीकृत डिजिटल प्रणाली में उपलब्ध हो सकेगा। इससे स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।

शुक्ल ने ई-एचएमआईएस के क्रियान्वयन में आने वाली तकनीकी और व्यावहारिक कठिनाइयों का समयबद्ध समाधान करने तथा स्वास्थ्य संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रणाली के माध्यम से प्राप्त जानकारी के आधार पर अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का नियमित आकलन करने में सुविधा होनी चाहिए। इससे समस्याओं की पहचान और उनके समाधान की प्रक्रिया तेज होगी।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-एचएमआईएस से प्राप्त डेटा का उपयोग भविष्य की स्वास्थ्य योजनाओं और नीतिगत निर्णयों में भी किया जाए, ताकि डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को मजबूत बनाया जा सके।

उन्होंने कहा कि ई-एचएमआईएस को प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की डिजिटल रीढ़ के रूप में विकसित किया जाए, जिससे तकनीक के माध्यम से मरीजों को तेज, पारदर्शी, सुगम और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लक्ष्य को प्रभावी रूप से हासिल किया जा सके।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।