राज्य

डिजिटल युग में हिंदी की बढ़ती संभावनाओं पर कोटा में मंथन

लेखक: DD Jaipur अंतिम अपडेट: 19 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
डिजिटल युग में हिंदी की बढ़ती संभावनाओं पर कोटा में मंथन

EPFO और केंद्रीय संचार ब्यूरो, कोटा के संयुक्त तत्वावधान में ‘राजभाषा हिंदी का महत्व एवं डिजिटल युग में उसकी संभावनाएं’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई। अधिकारियों-कर्मचारियों ने प्रशासनिक कार्यों में सरल और प्रभावी हिंदी के प्रयोग का संकल्प लिया। कोटा, 19 अगस्त।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), क्षेत्रीय कार्यालय कोटा और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के केंद्रीय संचार ब्यूरो, क्षेत्रीय कार्यालय कोटा के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को EPFO सभागार में ‘राजभाषा हिंदी का महत्व एवं डिजिटल युग में उसकी संभावनाएं’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।

कार्यक्रम में दोनों कार्यालयों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रशासनिक कार्यों में सरल, सहज और प्रभावी हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। संगोष्ठी में हिंदी के प्रशासनिक उपयोग के साथ डिजिटल तकनीक के दौर में भाषा की बढ़ती भूमिका पर भी चर्चा की गई। हिंदी पहचान और संस्कृति की वाहक

मुख्य वक्ता क्षेत्रीय आयुक्त द्वितीय सुधीर कुमार बत्रा ने कहा कि हिंदी भारत की विविधता, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता को जोड़ने वाली सशक्त भाषा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन में व्यवहारिक और सरल हिंदी का प्रयोग सुशासन, पारदर्शिता और जनसंपर्क को अधिक प्रभावी बनाता है।

उन्होंने कहा, “हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और हमारी सामूहिक चेतना की वाहक है।” उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से सरकारी कामकाज में ऐसी हिंदी के प्रयोग पर जोर दिया, जिसे आम नागरिक आसानी से समझ सके। प्रशासन और नागरिकों के बीच सशक्त माध्यम

सहायक आयुक्त अनुराधा सिंह ने कहा कि राजभाषा हिंदी शासन और नागरिकों के बीच संवाद का सशक्त माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से पत्राचार, नोटिंग और दैनिक कार्यालयीन कार्यों में हिंदी को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि कार्यालयीन कार्यों में सरल भाषा के इस्तेमाल से सरकारी योजनाओं और सेवाओं से जुड़ी जानकारी आम नागरिकों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सकती है। डिजिटल दौर में हिंदी की नई संभावनाएं

सहायक निदेशक रामेश्वर लाल मीणा ने हिंदी की ऐतिहासिक यात्रा, संविधान में इसके राजभाषा स्वरूप और डिजिटल युग में इसकी बढ़ती उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इंटरनेट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन शिक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के विस्तार के साथ हिंदी ज्ञान और तकनीक की सशक्त भाषा के रूप में उभर रही है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी की बढ़ती मौजूदगी से भाषा के प्रसार और उपयोग की नई संभावनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ हिंदी का बेहतर समन्वय होने से सरकारी सेवाओं, शिक्षा और सूचना के क्षेत्र में आम लोगों की भागीदारी और पहुंच को और मजबूत किया जा सकता है। सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान का संकल्प

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने राजभाषा हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के साथ भारत की सभी भाषाओं के सम्मान और संवर्धन का सामूहिक संकल्प लिया। संगोष्ठी में इस बात पर जोर दिया गया कि हिंदी को प्रशासनिक कामकाज में प्रभावी बनाने के साथ डिजिटल तकनीक के माध्यम से इसकी पहुंच को और व्यापक किया जाए।

कार्यक्रम ने हिंदी को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ते हुए सरल प्रशासन और बेहतर जनसंवाद की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।

D
DD Jaipur

वॉयस ऑफ क्रांति की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।