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दिल्ली हादसा- परिवार ने बेटे की आंखें दान कीं:पिता बोले- काश बेटे को PG से निकाल पाता; एक रात पहले ही वीडियो कॉल पर बात की

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 24 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
दिल्ली हादसा- परिवार ने बेटे की आंखें दान कीं:पिता बोले- काश बेटे को PG से निकाल पाता; एक रात पहले ही वीडियो कॉल पर बात की

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में PG बिल्डिंग गिरने से जान गंवाने वाले 18 साल के अर्पित जय के परिवार ने उनकी आंखें दान कर दीं। उनके पिता ने कहा कि काश बेटे को उस PG से निकाल पाते। एक रात पहले ही उससे वीडियो कॉल पर बात की थी। इसी तरह दिल्ली के बिल्डिंग हादसे में जान गंवाने वालों में DU के PGDAV कॉलेज के सेकेंड ईयर के छात्र अक्षत सिंह यादव भी थे।

उनकी मौत की खबर मिलने के बाद परिवार सोमवार सुबह नई दिल्ली के AIIMS ट्रॉमा सेंटर पहुंचा। अक्षत के शव को देखकर उनके माता-पिता टूट गए। उनकी बहन लीची सदमे में है और बोल नहीं पा रही है। दो दिन पहले ही अक्षत ने मां से वीडियो कॉल पर बात की थी। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। रेस्क्यू टीम ने सोमवार सुबह मलबे से एक और शव निकाला।

हादसा दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। हॉस्टल 5 मंजिला इमारत में था, जो करीब 40 साल पुरानी थी। रक्षाबंधन पर घर आया था परिवार के मुताबिक, अक्षत हाल ही में रक्षाबंधन पर घर आए थे। उनके पिता ने उन्हें कुछ दिन और रुकने के लिए कहा था, लेकिन अक्षत ने कहा कि उनका टिकट पहले ही बुक है और उन्हें दिल्ली लौटना होगा।

अक्षत को तलवारों में काफी दिलचस्पी थी। उनकी मां ने बताया कि हाल ही में 2,500 रुपए की एक तलवार घर पहुंची थी। वीडियो कॉल के दौरान परिवार ने उन्हें तलवार दिखाई तो वह बहुत खुश हुए। UPSC की तैयारी कर रहे थे अक्षत के पिता ने बताया कि उनके शिक्षक अक्सर अक्षत की पढ़ाई की तारीफ करते थे। अक्षत उनसे कहा करते थे, “पापा, एक दिन मैं अफसर बनकर आपको गर्व महसूस कराऊंगा।” अक्षत के पिता ने इस हादसे को लेकर प्रशासन से सवाल किया।

उन्होंने कहा कि ऐसी इमारतों का नियमित निरीक्षण होना चाहिए, ताकि वहां रहने या पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा, “लोग अपने बच्चों को इन इमारतों में यह भरोसा करके भेजते हैं कि वे सुरक्षित हैं। हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारा बेटा वहां असुरक्षित होगा।” पिता बोले- बेटे को PG में नहीं रहने देता अर्पित के पिता भूपेंद्र जय ने कहा, “मेरा बेटा रक्षाबंधन की छुट्टियों के बाद हमारे शहर से वापस लौटा था।

वह कल सुबह अपने PG पहुंचा था और अगली बार हमने उसे उसके शव के रूप में देखा।” उन्होंने कहा, “हर कोई हमें बता रहा है कि PG की हाल

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

दिल्ली के इस दुखद हादसे से हमें यह सीख मिलती है कि सुरक्षित आवास और जिम्मेदार प्रबंधन का कितना महत्व है। जब PG बिल्डिंग जैसी संरचनाएँ अनियमित रूप से रखरखाव से वंचित रहती हैं, तो जीवन जोखिम में पड़ जाता है। समाज को चाहिए कि वह निर्माण मानकों को कड़ाई से लागू करे, और परिवारों को आपातकालीन योजनाएँ बनानी चाहिए। इस त्रासदी में हमें याद दिलाता है कि सुरक्षा के प्रति जागरूकता और सहयोग ही जीवन बचा सकता है।

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