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दिल्ली इमारत हादसे में देवास के अर्पित की मौत:एक दिन पहले रक्षाबंधन मनाकर लौटा था; दोपहर 12 बजे मां को वीडियो कॉल किया था

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 6 अक्टूबर 2026 👁️ 19 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
दिल्ली इमारत हादसे में देवास के अर्पित की मौत:एक दिन पहले रक्षाबंधन मनाकर लौटा था; दोपहर 12 बजे मां को वीडियो कॉल किया था

दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे में देवास के अर्पित जाज (21) की भी मौत हुई है। अर्पित देवास के कैलादेवी क्षेत्र के पास स्थित जय बजरंग नगर का रहने वाला था और दिल्ली यूनिवर्सिटी से बी.कॉम सेकंड ईयर में पढ़ रहा था। उसने 12वीं की पढ़ाई देवास की सेंट्रल इंडिया एकेडमी से की थी। अर्पित रक्षाबंधन मनाने के लिए घर आया था और 5 सितंबर को ही वापस दिल्ली चला गया था।

हादसा दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में 6 सितंबर की दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। इमारत करीब 40 साल पुरानी थी। दिल्ली नगर निगम (MCD) के रिकॉर्ड में इसे खतरनाक घोषित नहीं किया गया था। अर्पित के पिता भूपेंद्र जाज देवास में ट्रैवल एजेंसी चलाते हैं। हादसे की जानकारी मिलते ही परिवार रविवार देर रात दिल्ली पहुंचा और अस्पताल सहित घटनास्थल पर उसकी तलाश की।

सोमवार को अर्पित का शव मिलने की पुष्टि हुई। अर्पित की एक बड़ी बहन प्रियांशी है, जो इंदौर में सीए की पढ़ाई कर रही है। देखिए, तीन तस्वीरें… आखिरी बार मां से वीडियो कॉल पर बात हुई थी भूपेंद्र जाज ने बताया कि बेटा अर्पित दिल्ली के आत्माराम कॉलेज में बी.कॉम सेकेंड ईयर में पढ़ता था। पिछले साल से पीजी में रह रहा था।

जब यहां आया था, तब उस बिल्डिंग की हालत ठीक थी। अर्पित की मां ने कहा- रक्षाबंधन मनाकर एक दिन पहले ही वह दिल्ली आया था। हमने उसे ट्रेन में बैठाया था। रविवार दोपहर 12 बजे वीडियो कॉलिंग से बात हुई थी। दो बजे मैंने उसे फिर फोन लगाया, उसने रिसीव नहीं किया। मुझे लगा कि वह रातभर ट्रैवल करके दिल्ली पहुंचा है।

थककर सो गया होगा। दिल्ली में ही होगा शव का पोस्टमॉर्टम देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने बताया कि उन्होंने अर्पित के परिवार से बात की है। शव का दिल्ली में ही पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है। इसके बाद इसे देवास लाया जाएगा। रविवार सुबह 10 बजे हॉस्टल पहुंचा था विजय शर्मा ने कहा- अर्पित मेरे मुंहबोले साले का बेटा था।

जन्माष्टमी के दिन हम सब परिवार के साथ थे। रात करीब 11 बजे तक हम साथ रहे। इसके बाद इटावा और सांवरिया सेठ मंदिर गए थे। हमने अर्पित से कहा था कि रविवार को निकलकर सोमवार को दिल्ली पहुंच जाना। लेकिन उसका आने-जाने का रिजर्वेशन पहले से था, इसलिए वह शनिवार को ही निकल गया। अर्पित रविवार सुबह करीब 10 बजे अपने हॉस्टल पहुंच गया था।

हादसे से करीब डेढ़ घंटे पहले उसके माता-पित

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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