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दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन नहीं हो सकेगा:कॉकरोच पार्टी ने यहां 36 दिन तक धरना दिया था; सरकार ने अब 3 नई जगहें बताईं

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 12 अक्टूबर 2026 👁️ 2 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन नहीं हो सकेगा:कॉकरोच पार्टी ने यहां 36 दिन तक धरना दिया था; सरकार ने अब 3 नई जगहें बताईं

दिल्ली में अब जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन नहीं हो सकेंगे। सरकार ने कमेटी की सिफारिशों के आधार पर इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की लिस्ट से हटा दिया है। इसके स्थान पर रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को नए प्रदर्शन स्थलों के रूप में नामित किया गया है। कॉकरोच जनता पार्टी ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR पर रोक की मांग को लेकर सोमवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की परमिशन मांगी थी।

पुलिस ने परमिशन देने से इनकार कर दिया है। इससे पहले CJP ने 20 जून से 25 जुलाई तक NEET पेपर लीक के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए प्रदर्शन किया था। 36 दिन तक चले इस प्रदर्शन के दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर बैठे थे। गृह मंत्रालय ने कमेटी बनाई थी गृह मंत्रालय ने विरोध-प्रदर्शन और धरना आयोजित करने के लिए वैकल्पिक स्थानों की पहचान करने के उद्देश्य से एक कमेटी बनाई थी।

समिति की सिफारिशों के बाद इन तीनों स्थानों को प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया गया है। रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और CBD ग्राउंड में धरना-प्रदर्शन आयोजित करने की प्रक्रिया और नियमों को लेकर संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अलग से जारी की जाएगी। फिलहाल आदेश में इन दिशा-निर्देशों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

जंतर-मंतर पर 33 साल से प्रदर्शन शुरू हुए जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट करना 1993 से शुरू हुए थे। इससे पहले बड़े प्रदर्शन संसद के पास बोट क्लब पर होते थे। बाद में वहां प्रदर्शन पर रोक लगी, तो जंतर-मंतर पर धरने होने लगे। 1988 में बोट क्लब पर बड़ा किसान आंदोलन हुआ था। किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान दिल्ली पहुंचे थे।

इसके बाद बोट क्लब पर भीड़ जुटाने को लेकर सख्ती बढ़ गई। 1993 में बोट क्लब पर प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी गई। इसके बाद जंतर-मंतर पर धरने और प्रदर्शन होने लगे। यह संसद के पास था, इसलिए यहां प्रदर्शन करके सरकार तक अपनी बात पहुंचाना आसान था। धीरे-धीरे यह प्रदर्शन की बड़ी जगह बन गया। हालांकि, उस समय जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल बनाने के लिए कोई अलग से औपचारिक सरकारी मंजूरी नहीं दी गई थी।

दिल्ली पुलिस वहां प्रदर्शन करने की अनुमति देने लगी और धीरे-धीरे यह व्यवस्था चलन में आ गई। 2017 में जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन रोकने का आदेश आया। आसपास

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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