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दिल्ली पीजी हादसा-किरण बेदी हाईकोर्ट पहुंचीं, केंद्र ने विरोध किया:कोर्ट ने कहा- बेदी को प्रशासन का अनुभव, 11 दिन पहले गिरी थी 5 मंजिला इमारत

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 18 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
दिल्ली पीजी हादसा-किरण बेदी हाईकोर्ट पहुंचीं, केंद्र ने विरोध किया:कोर्ट ने कहा- बेदी को प्रशासन का अनुभव, 11 दिन पहले गिरी थी 5 मंजिला इमारत

पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल और रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी किरण बेदी गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचीं। उन्होंने सत्या निकेतन में हॉस्टल की इमारत गिरने से जुड़े मामले में खुद को केस में शामिल करने की मांग की। केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम (MCD) की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने बेदी की याचिका का विरोध किया।

उन्होंने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने कहा कि बेदी देश की जिम्मेदार नागरिक हैं और उन्हें प्रशासन का अनुभव है। सत्य निकेतन में दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास लड़कों के लिए 5 मंजिला पेइंग-गेस्ट हॉस्टल था। 6 सितंबर को मरम्मत के दौरान यह इमारत गिर गई थी।

मलबे में दबने से 7 लोगों की मौत हुई थी। कई घायल भी हुए थे। सत्य निकेतन का मलबा हटने के बाद की 2 तस्वीरें… मैप के जरिए समझिए हादसे की लोकेशन… बेदी की याचिका पर जवाब के लिए 3 दिन मिले कोर्ट ने कहा कि पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल रहीं किरण बेदी मामले में कोर्ट की मदद करना चाहती हैं। उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कोर्ट ने अधिकारियों से मामले को टकराव के रूप में न देखने को कहा। अदालत ने बेदी की याचिका पर जवाब देने के लिए अधिकारियों को 3 दिन का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि वह किरण बेदी का बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन उनकी याचिका से लगता है कि वह मामले में पहले ही निष्कर्ष निकाल रही हैं।

उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों ने अभी अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल नहीं की है। 7 सितंबर को कहा था- सरकार जिम्मेदारी से बच नहीं सकती हाईकोर्ट ने 7 सितंबर को घटना की उच्चस्तरीय MCD जांच का आदेश दिया था। कोर्ट ने साफ कहा था कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। कोर्ट ने कहा था कि यह घटना सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं है।

इससे हॉस्टल समेत छात्रों के लिए पर्याप्त आवास सुविधाओं पर गंभीर चिंता पैदा हुई है। अदालत ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और सरकार की ओर से चलाए जा रहे हॉस्टलों की स्थिति पर भी चिंता जताई थी। इसके अलावा, छात्रों की सुरक्षा और पेइंग-गेस्ट सुविधाओं को नियंत्रित करने के लिए MCD और अन्य अधिकारियों के अपर्याप्त कदमों पर सवाल उठाए थे।

गिरफ्तार आरोपियों में PG मालिक

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

किरण बेदी, पूर्व उपराज्यपाल और रिटायर्ड आईपीएस, दिल्ली हाईकोर्ट में सत्या निकेतन हॉस्टल इमारत गिरने के मामले में अपनी भूमिका की मांग कर रही हैं। यह विषय सरकारी जवाबदेही और सार्वजनिक सुरक्षा पर केंद्रित है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि उच्च पदस्थ अधिकारियों को भी कानूनी प्रक्रिया में शामिल होने का अधिकार है, और यह प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता पर सवाल उठाती है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि नागरिकों को सरकारी कार्यों पर अधिक निगरानी और जवाबदेही की अपेक्षा बढ़ेगी, जिससे सार्

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

किरण बेदी की घटना से हमें यह सिखने को मिलता है कि जब भी किसी भी प्रकार का विवाद या दुर्घटना हो, तो कानूनी रास्तों का सहारा लेना सबसे सुरक्षित और न्यायसंगत विकल्प है। समाज में सहानुभूति और जिम्मेदारी का भाव विकसित करना चाहिए, ताकि पीड़ितों को त्वरित सहायता मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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