दिल्ली पुलिस डायर…, मुंबई से दीपके की हुंकार- ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक जारी रहेगा प्रदर्शन
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मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार दोपहर मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की अगुवाई में हुए प्रदर्शन में हजारों लोग जुटे.
पुलिस द्वारा प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद नारे लिखी तख्तियां और तिरंगा लिए बड़ी संख्या में युवा राजनीतिक रैलियों के लिए प्रसिद्ध इस मैदान में पहुंचे.
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाना बनाते हुए व्यंग्यात्मक मीम और फिल्मों के संवाद वाली तख्तियां लेकर बड़ी संख्या में युवा प्रदर्शनकारी पहुंचे.
शिवाजी पार्क में पुलिस द्वारा बड़ी संख्या में लगाए गए बैरिकेड और तेज गर्मी भी प्रदर्शनकारियों के उत्साह को कम नहीं कर सकी.
शिवाजी पार्क के निवासियों के विरोध और दादर स्टेशन तक भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद प्रदर्शनकारी क्रांतिकारी नारों, गांधी के उद्धरणों और कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग वाले पोस्टर थामे नजर आए.
तिरंगे के साथ ज्ञानू, तुझा डेमोक्रेसी वर भरोसा नाय के? , ज्ञानेश ब्रो, जस्ट रिजाइन और गद्दार ज्ञानू मस्ट गो जैसे नारे लिखे पोस्टर लिए स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) समेत विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में युवा इलाके में जुटे.
सीजेपी का बड़ा प्रदर्शन
अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी, गायक विशाल ददलानी और महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी भी प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे.
शिवसेना (उबाठा) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने सीजेपी के आंदोलन को समर्थन दिया है.
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार इतनी अक्षम है कि नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के दो महीने के भीतर ही उन्हें एक और प्रदर्शन करना पड़ा.
उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को प्रदर्शनकारियों को जेल भेजने की चुनौती भी दी.
सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर शु
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में हजारों लोगों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए प्रदर्शन किया। यह विषय चुनावी प्रक्रियाओं और राजनीतिक दावों पर केंद्रित है, जहाँ नागरिक अपनी असंतुष्टि व्यक्त कर रहे हैं। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चुनाव आयोग की पारदर्शिता और निर्णयों पर सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित कर सकती है, और यदि आयुक्त इस्तीफा देते हैं तो चुनावी कैलेंडर में बदलाव आ सकते हैं। आम जनता पर इसका असर चुनावी प्रक्रिया में बदलाव, राजनीतिक