दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजधानी के सत्य निकेतन में हुए भवन हादसे को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी के सत्य निकेतन में हुए भवन हादसे को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। इस हादसे में कई लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए हैं। न्यायालय की पीठ ने कहा कि इस त्रासदी के लिए केवल भवन मालिक ही जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि दिल्ली नगर निगम और दिल्ली विश्वविद्यालय भी जिम्मेदार हैं। न्यायालय ने कहा कि विश्वविद्यालय ने दूसरे राज्यों से आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त आवास की व्यवस्था नहीं की है। इसके कारण उन्हें निजी पीजी हॉस्टल में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
न्यायालय ने बचाव कार्य में तेजी लाने और अधिक प्रयास करने के निर्देश दिए, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। केंद्र, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और नगर निगम की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं और सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है।
न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को याचिका पर अलग-अलग जवाब दस दिन के भीतर दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।