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दीपावली पर बिछड़ी महिला को मिला परिवार, महिला एवं बाल विकास विभाग ने 8 दिन की मशक्कत के बाद कराई सुरक्षित घर वापसी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 8 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
दीपावली पर बिछड़ी महिला को मिला परिवार, महिला एवं बाल विकास विभाग ने 8 दिन की मशक्कत के बाद कराई सुरक्षित घर वापसी

दीपावली के पर्व पर रीवा की एक बिछड़ी महिला के जीवन में भी खुशियां लौट आईं। महिला एवं बाल विकास विभाग और वन स्टॉप सेंटर की संवेदनशील पहल से करीब आठ दिनों से भटक रही 40 वर्षीय मूक-बधिर महिला उषा कोल को आखिरकार उनका परिवार मिल गया। विभागीय टीम ने तमाम प्रयासों के बाद महिला की पहचान सुनिश्चित कर उन्हें सुरक्षित परिजनों तक पहुंचाया।

दरअसल, रीवा जिले के डभौरा नगर पंचायत की रहने वाली उषा कोल ट्रेन से यात्रा कर रही थीं। इस दौरान शिवपुरी में पानी लेने के लिए ट्रेन से नीचे उतरीं, लेकिन ट्रेन छूट जाने के कारण वहीं भटक गईं। 29 अक्टूबर को शिवपुरी जिले के सिरसौद थाना क्षेत्र के ग्राम गूगरीपुरा में वह लावारिस हालत में घूमती मिलीं। स्थानीय व्यक्ति की सूचना पर डायल 112 की मदद से उन्हें वन स्टॉप सेंटर शिवपुरी पहुंचाया गया।

महिला मूक-बधिर होने के साथ मानसिक रूप से कमजोर भी थीं, जिसके चलते वह अपनी पहचान और घर के बारे में कोई जानकारी नहीं दे पा रही थीं। महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी एवं वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी प्रशासक नीलम पटेरिया के नेतृत्व में उनकी काउंसलिंग का प्रयास किया गया। इसी दौरान अधिकारियों की नजर महिला के दाहिने हाथ पर गुदे 'रीवा मध्यप्रदेश डभौरा बाजार' शब्दों पर पड़ी। यही उनकी पहचान का अहम सुराग बना।

इसके बाद शिवपुरी वन स्टॉप सेंटर ने रीवा के जिला कार्यक्रम अधिकारी नयन सिंह और रीवा वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी प्रशासक श्रुति मिश्रा से संपर्क किया। रीवा की टीम ने महिला की तस्वीर डभौरा क्षेत्र में भेजकर स्थानीय वार्ड पार्षद धीरेन्द्र सिंह की मदद ली। इसके बाद महिला के चाचा छोटे लाल कोल और परिवार के अन्य सदस्यों की पहचान कर वीडियो कॉल के जरिए पुष्टि की गई।

परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने और शिवपुरी आने में असमर्थता को देखते हुए प्रशासन ने मानवीय पहल की। शिवपुरी के अपर जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर महिला को पुलिस अभिरक्षा में वन स्टॉप सेंटर रीवा स्थानांतरित किया गया। इसके बाद 6 नवंबर को सभी आवश्यक कानूनी और विभागीय प्रक्रियाएं पूरी कर पंचनामा तैयार किया गया और उषा कोल को डभौरा में उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

इस तरह महिला एवं बाल विकास विभाग, वन स्टॉप सेंटर, पुलिस प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के आपसी समन्वय से दीपावली पर एक बिछड़ी महिला को उसका परिवार वापस मिल गया।

----ट्रेन छूटने के बाद शिवपुरी में भटक गई थीं 40 वर्षीय उषा कोल

मूक-बधिर महिला की पहचान में हाथ पर गुदे पते से मिली मदद

वन स्टॉप सेंटर की टीम ने वीडियो कॉल से खोजा परिवार

प्रशासन ने विशेष व्यवस्था कर महिला को रीवा पहुंचाया

6 नवंबर को डभौरा में परिजनों के सुपुर्द की गईं उषा कोल

💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर दीपावली के अवसर पर एक बिछड़ी मूक-बधिर महिला के परिवार से मिलने की कहानी है। 40‑वर्षीय उषा कोल, जो लगभग आठ दिन भटकती रही, को महिला एवं बाल विकास विभाग और वन स्टॉप सेंटर की मदद से पहचान कर सुरक्षित घर लौटाया गया। यह घटना दिखाती है कि सरकारी विभागों की त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई से समाज में बिछड़े लोगों की पुनः पहचान संभव है। ऐसी पहल से समाज में विश्वास बढ़ता है और अन्य बिछड़ी व्यक्तियों के लिए भी आशा की किरण जगती है, जिससे सामाजिक समरसता और सुरक्षा की भावना मजबूत होती है।

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

दीपावली के उजाले में उषा कोल की कहानी हमें याद दिलाती है कि समाज की सहानुभूति और त्वरित कार्रवाई से किसी की ज़िंदगी बदल सकती है। जब कोई व्यक्ति खो जाता है, तो परिवार की खोज के लिए कानूनी और सामाजिक नेटवर्क को सक्रिय करना चाहिए; विभागीय टीमों को तुरंत सूचना देना, पहचान दस्तावेज़ जुटाना और सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करना ज़रूरी है। यह घटना हमें सिखाती है कि एकजुटता और संवेदनशीलता से हम हर भटके हुए दिल को घर लौटा सकते हैं।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।