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दीपावली-छठ पर घर लौटने वालों की भीड़, कटनी से गुजरने वाली उत्तर भारत की ट्रेनों में यात्रियों की भारी परेशानी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 8 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
दीपावली-छठ पर घर लौटने वालों की भीड़, कटनी से गुजरने वाली उत्तर भारत की ट्रेनों में यात्रियों की भारी परेशानी

दीपावली और छठ महापर्व पर अपने घर लौटने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने से कटनी से गुजरने वाली उत्तर भारत की ट्रेनों में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जाने वाली ट्रेनों के जनरल और स्लीपर कोच में यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि कई ट्रेनों में यात्रियों को बैठने तक की जगह नहीं मिल पा रही है।

कटनी जंक्शन, कटनी मुरवारा और कटनी साउथ रेलवे स्टेशनों पर सुबह से देर रात तक यात्रियों की भीड़ लगी हुई है। त्योहारों के चलते बड़ी संख्या में लोग अपने घरों की ओर रवाना हो रहे हैं, जिससे रेलवे स्टेशनों पर भी लगातार दबाव बढ़ रहा है।

यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे ने उधना-जयनगर, अहमदाबाद-राजगीर और राजकोट-बरौनी सहित कई स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू किया है। इसके अलावा सीएसएमटी-मुजफ्फरपुर स्पेशल ट्रेन भी कटनी होकर गुजर रही है। बावजूद इसके ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है।

यात्रियों का कहना है कि त्योहारों के दौरान ट्रेनों में अतिरिक्त जनरल कोच लगाए जाने चाहिए और स्पेशल ट्रेनों के फेरे बढ़ाए जाने चाहिए, ताकि घर जाने वाले लोगों को राहत मिल सके।

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दीपावली और छठ पर घर लौटने वालों की ट्रेनों में उमड़ी भीड़

कटनी के तीनों रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़

जनरल और स्लीपर कोच में सफर करना हुआ मुश्किल

रेलवे की स्पेशल ट्रेनें भी यात्रियों की भीड़ के आगे नाकाफी

अतिरिक्त जनरल कोच और स्पेशल ट्रेनों के फेरे बढ़ाने की मांग

💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर दीपावली और छठ के दौरान कटनी से गुजरने वाली उत्तर भारत की ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ और असुविधा पर प्रकाश डालती है। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि त्योहारों के मौसम में लोगों का घर लौटना बढ़ जाता है, जिससे ट्रेन सेवाओं पर दबाव बढ़ता है और यात्रियों को बैठने या आराम करने में कठिनाई होती है। इस स्थिति से आम जनता पर असर पड़ता है: लंबी कतारें, स्वास्थ्य जोखिम, और यात्रा का तनाव बढ़ता है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।