दीपावली पर मिट्टी को आकार देने में जुटे रांची के नगड़ी के कुंभकार
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दीपावली पर मिट्टी को आकार देने में जुटे रांची के नगड़ी के कुंभकार, मिट्टी के दीये, ग्वालन समेत कई आकर्षक सजावटी सामान कर रहे तैयार, इलेक्ट्रिक चाक से समय की बचत और बढ़े उत्पाद, ‘वोकल फोर लोकल’ और ‘स्वदेशी अभियान’ को मिला बढ़ावा।
Short Headline: दीपावली पर मिट्टी को आकार देने में जुटे रांची के नगड़ी के कुंभकार
नगड़ी दीया, रांची, डीडी
दीपावली पर मिट्टी को आकार देने में जुटे कुंभकार
रांची के नगड़ी में कुंभकारों का परिवार बना रहा उत्पाद
मिट्टी के दीये, ग्वालन समेत कई आकर्षक सजावटी सामान
‘वोकल फोर लोकल’ और ‘स्वदेशी अभियान’ को मिला बढ़ावा
एंकर दीपावली आते ही बाजारों में रौनक बढ़ गई है। इस पर्व को रोशन करने के लिए रांची के नगड़ी स्थित साहेर डोकाटोली में कुंभकारों का परिवार दिन-रात मेहनत कर मिट्टी को आकार देने में जुटा है। महिला और पुरुष मिलकर मिट्टी के दीये, ग्वालन समेत कई सजावटी सामान तैयार कर रहे हैं। ये मिट्टी के दीये न केवल घरों को रोशन करेंगे, बल्कि इससे वोकल फोर लोकल को भी बढ़ावा मिलेगा।
होल्ड अप साउंड रिपोर्ट
वीओ 01. रांची के नगड़ी स्थित साहेर डोकाटोली में कुंभकारों के घरों में चाक की रफ्तार तेज हो गई है। दीपावली को लेकर वो मिट्टी से दीया, ग्वालन, खिलौने, हाथी समेत कई सजावटी सामान तैयार करने में जुटे हैं। कुंभकार राधिका देवी और खुशबू प्रजापति ने बताया कि दीपावली खुशियों का त्योहार है और मिट्टी के उत्पाद इसे खूबसूरत बनाते हैं। बाइट- राधिका देवी, कुंभकार (जिन उत्पादों का निर्माण की हैं, वो बाइट लेना है)
बाइट- खुशबू प्रजापति, कुंभकार
वीओ 02. वोकल फोर लोकल को बढ़ावा देते ये मिट्टी के उत्पाद कुंभकार परिवारों के आजीविका का मुख्य साधन है। यहां की युवा पीढ़ी अपनी पारंपरिक कारोबार को आधुनिक स्वरूप प्रदान करने में जुटी है। कुंभकार संजय प्रजापति ने भारतीय परंपरा में मिट्टी के उत्पादों का विशेष महत्व है। वहीं, रंजीत प्रजापति और सुरेश प्रजापति ने बताया कि कारोबार को आगे बढ़ाने में केन्द्र सरकार का विशेष सहयोग है।
बाइट- संजय प्रजापति, कुंभकार बाइट- रंजीत प्रजापति, कुंभकार
बाइट- सुरेश प्रजापति, कुंभकार
वीओ 03. स्थानीय कुंभकारों के हाथों तैयार दीये त्योहार की रौनक बढ़ाने के साथ पारंपरिक हस्तकला को भी जीवित रखे हुए है। कुंभकार प्रदीप प्रजापति और सरयू प्रजापति ने बताया कि पहले मिट्टी के चाक पर उत्पादों का निर्माण करना पड़ता था। लेकिन केन्द्र सरकार की मदद से इलेक्ट्रिक चाक मिला है, जिससे कम समय में बड़े पैमाने पर उत्पाद तैयार होते हैं और उत्पादों को भी बाजार मिल रहा है।
बाइट- प्रदीप प्रजापति, कुंभकार बाइट- सरयू प्रजापति, कुंभकार
अंतिम वीओ मिट्टी के इन दीयों और सजावटी सामानों में कुंभकार परिवारों की मेहनत, हुनर और उम्मीदें जुड़ी हैं। आधुनिक तकनीक और सरकारी सहयोग से पारंपरिक कुम्हारी कला को नया आयाम मिल रहा है। ऐसे में दीपावली पर स्थानीय कारीगरों के बनाए मिट्टी के उत्पादों को अपनाना न केवल वोकल फोर लोकल को बढ़ावा देगा, बल्कि इन परिवारों की आजीविका को भी मजबूती प्रदान करेगा।
रांची से सहयोगी विकास कुमार के साथ प्रणय प्रबोध की रिपोर्ट।