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3 दिव्यांग बेटियां और बूढ़े मां-बाप...,ओडिशा के परिवार की कहानी झकझोर देगी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 8 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
3 दिव्यांग बेटियां और बूढ़े मां-बाप...,ओडिशा के परिवार की कहानी झकझोर देगी

ओडिशा के क्योंझर जिले के बांसपाल ब्लॉक के घुंघी गांव से सामने आई एक परिवार की कहानी सरकारी योजनाओं की पहुंच और दिव्यांग लोगों की मुश्किलों पर सवाल खड़े करती है.

नटबर जुआंग और उनकी पत्नी कुंद जुआंग अपनी तीन दिव्यांग बेटियों के साथ बेहद सीमित साधनों में जीवन गुजार रहे हैं.

परिवार की सबसे बड़ी चिंता आज की जरूरतों से ज्यादा उन बेटियों का भविष्य है, जिनकी देखभाल के लिए उन्हें लगातार सहारे की जरूरत पड़ती है.

नटबर जुआंग की कुल पांच बेटियां हैं.

इनमें दो की शादी हो चुकी है, जबकि तीन बेटियां दिव्यांगता के साथ अपने माता-पिता पर निर्भर हैं.

उनकी स्थिति ऐसी है कि वे सामान्य बच्चों की तरह आसानी से चल-फिर नहीं सकतीं और रोजमर्रा के कई कामों के लिए भी दूसरे लोगों की मदद की जरूरत पड़ती है.

गांव में जब दूसरे बच्चे खेलते और दौड़ते हैं, तब ये तीनों बहनें अक्सर उन्हें दूर से ही देख पाती हैं. उनके लिए घर से बाहर निकलना भी आसान नहीं है.

पैरों से चलने में परेशानी के कारण उन्हें जमीन पर घिसटकर या किसी तरह आगे बढ़ना पड़ता है.

कच्ची और ऊबड़-खाबड़ सड़कें

घुंघी गांव की कच्ची और ऊबड़-खाबड़ सड़कें उनकी परेशानी को और बढ़ा देती हैं.

बारिश के मौसम में कीचड़ के कारण स्थिति और कठिन हो जाती है.

ऐसे में इलाज के लिए बाहर जाना, स्कूल पहुंचना या किसी जरूरी काम से घर से निकलना परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है.

न खेती की जमीन, न कमाई का स्थायी साधन

6 सदस्यों वाला यह परिवार छोटे से घर में रहता है.

नटबर जुआंग के पास खेती करने के लिए अपनी जमीन नहीं है और परिवार की कोई नियमित आय भी नहीं है.

पहले नटबर और उनकी पत्नी मजदूरी करके घर चलाते थे, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ अब उनके लिए लगातार मेहनत करना मुश्किल हो गया है. ऐसे में परिवार को सरकारी सहायता और खाद्यान्न पर काफी निर्भर रहना पड़ रहा है.

परिवार के अनुसार, उन्हें आदिवासी समुदाय के तहत हर महीने 35 किलो चावल मुफ्त मिलत

📡 स्रोत: ABP Live

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह कहानी ओडिशा के क्योंझर जिले के बांसपाल ब्लॉक के घुंघी गांव के एक दिव्यांग परिवार की है, जिसमें नटबर जुआंग और उनकी पत्नी कुंद जुआंग तीन दिव्यांग बेटियों के साथ सीमित साधनों में जीवन जी रहे हैं। यह विषय दिव्यांग लोगों की सरकारी योजनाओं तक पहुँच और देखभाल की कठिनाइयों को उजागर करता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि सरकारी सहायता योजनाएँ अक्सर अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुँच पातीं, जिससे परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इस प्रकार की रिपोर्ट से आम जनता में दिव्यांग कल्याण नीतियों के प्रत

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