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DMK ने SIR विरोध पर कांग्रेस से पूछा सवाल:ए राजा बोले- शुरुआत से विरोध, CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 17 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
DMK ने SIR विरोध पर कांग्रेस से पूछा सवाल:ए राजा बोले- शुरुआत से विरोध, CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग

चेन्नई में DMK सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा ने SIR को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि DMK शुरुआत से इसका विरोध कर रही है। राजा ने कांग्रेस के DMK की आलोचना करने के “नैतिक अधिकार” पर सवाल उठाया। यह बयान DMK संसदीय दल की बैठक में चार प्रस्ताव पास होने के बाद आया। बैठक में CEC ज्ञानेश कुमार को तुरंत हटाने और उनके कामकाज की जांच की मांग की गई।

पार्टी ने SIR रद्द करने और चुनाव सुधारों के लिए राष्ट्रपति को ज्ञापन देने का फैसला भी किया। DMK अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की अध्यक्षता में बैठक चेन्नई के अन्ना अरिवालयम स्थित मुरासोली मारन मीटिंग हॉल में हुई। ए राजा बोले- DMK ने शुरुआत से विरोध किया चेन्नई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ए राजा ने कहा कि DMK ने SIR लागू होने के समय से ही इसका विरोध किया है।

पार्टी ने संसद के अंदर और बाहर कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा, “SIR लागू होने के बाद से DMK पूरे भारत में इसका लगातार और मजबूती से विरोध और पर्दाफाश करने वाली प्रमुख राजनीतिक पार्टी रही है।” राजा के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखे थे। कुछ मुख्यमंत्री चेन्नई भी आए और SIR के खिलाफ चर्चा कर प्रस्ताव पास किए।

उन्होंने कहा कि DMK संसदीय दल का प्रस्ताव तमिलनाडु की जनता और देशभर के राजनीतिक पर्यवेक्षकों के सामने पार्टी के विरोध का क्रम रखने के लिए तैयार किया गया है। राजा ने कहा, “इस प्रस्ताव में हमने कांग्रेस की स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। हमने पूछा है कि क्या कांग्रेस को इस मुद्दे पर हमें सवाल करने का नैतिक अधिकार है।” उन्होंने दोहराया कि SIR शुरू होने के बाद से DMK ने बिना किसी बदलाव या झिझक के अपना रुख कायम रखा है।

पहला प्रस्ताव: CEC को हटाने की मांग पहले प्रस्ताव में CEC ज्ञानेश कुमार को तुरंत पद से हटाने और उनके कामकाज की जांच की मांग की गई। DMK ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए वैध मतदाताओं को व्यवस्थित तरीके से मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। प्रस्ताव के मुताबिक, स्टालिन ने जुलाई 2025 में SIR का विरोध शुरू किया था।

उस समय बिहार में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की चिंताएं सामने आई थीं। बिहार में SIR पहली बार लागू किया गया था। स्टालिन ने बिहार में वोटर अधिकार यात्रा में भी हिस्सा लिय

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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